पांढुर्णा सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग: 4 फसलों पर संकट, सूखी फसल लेकर किसानों ने रोका CM का काफिला

पांढुर्णा को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर रविवार को किसान सूखी और मुरझाई फसलें लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के काफिले के सामने पहुंच गए। किसानों का कहना है कि कम बारिश से कपास, तुअर, ज्वार और मूंगफली समेत 4 प्रमुख खरीफ फसलें प्रभावित हुई हैं। किसानों ने गांव-गांव फसल नुकसान का सर्वे, बीमा-मुआवजा जल्द देने और रबी के लिए पानी की व्यवस्था करने की मांग की, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को सर्वे के निर्देश दिए।
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किसान कल्चर, पांढुर्णा: हाथों में सूखी और मुरझाई फसलें लेकर पांढुर्णा के किसान रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के काफिले के सामने पहुंच गए। कम बारिश से परेशान किसानों ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने, गांवों में फसल नुकसान का तत्काल सर्वे कराने और बीमा-मुआवजा जल्द देने की मांग रखी। खरीफ की कमजोर होती फसल के बीच अब किसानों की चिंता आने वाली रबी को लेकर भी है, क्योंकि खेतों की नमी और सिंचाई के पानी दोनों पर दबाव बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री का काफिला दोपहर करीब 2 बजे कार्यक्रम स्थल से रवाना हो रहा था। इसी दौरान सांदीपनी विद्यालय परिसर के मुख्य द्वार के आसपास किसान जमा हो गए और काफिला रुक गया। किसानों के हाथों में खराब फसलें थीं, जिन्हें दिखाकर उन्होंने कम बारिश से खेतों में बने हालात की जानकारी दी।
भारतीय किसान संघ ने कहा, गांव-गांव हो नुकसान का सर्वे
भारतीय किसान संघ ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर पांढुर्णा को तत्काल सूखाग्रस्त जिला घोषित करने की मांग की है। संगठन चाहता है कि नुकसान का आकलन केवल सरकारी आंकड़ों से न हो, बल्कि प्रशासन की टीम खेतों तक पहुंचे और वास्तविक फसल क्षति दर्ज करे।
भारतीय किसान संघ के पांढुर्णा तहसील मंत्री रवि शंकर गौरे ने किसान कल्चर से बात करते हुए कहा कि, “पांढुर्णा जिले को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित किया जाना चाहिए। गांवों में फसल क्षति का सर्वे कराया जाए और किसानों को फसल बीमा व मुआवजा राशि जल्द दी जाए। पेयजल के साथ रबी की फसल के लिए भी अभी से पानी की व्यवस्था करना जरूरी है।”
किसानों का कहना है कि यदि सर्वे में देरी हुई तो नुकसान का सही आकलन मुश्किल हो सकता है। इसके साथ ही किसान चाहते हैं कि सर्वे के बाद राहत और बीमा की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़े।
कम बारिश से खरीफ पर असर, रबी की भी बढ़ी चिंता
स्थानीय स्तर पर किसानों ने कपास, तुअर और मूंगफली समेत कई खरीफ फसलों पर कम बारिश का असर बताया है। कुछ रिपोर्टों में ज्वार की फसल प्रभावित होने की बात भी सामने आई है। किसानों का कहना है कि लंबे अंतराल तक पर्याप्त पानी नहीं मिलने से खेतों की नमी घट गई और कई जगह फसल मुरझाने लगी।
यही वजह है कि किसानों की चिंता केवल मौजूदा खरीफ तक सीमित नहीं है। रबी की बुवाई के लिए जमीन में पर्याप्त नमी और उसके बाद सिंचाई की जरूरत होगी। यदि जल स्रोतों की स्थिति नहीं सुधरी तो गेहूं, चना और दूसरी रबी फसलों की तैयारी भी प्रभावित हो सकती है।
इससे पहले भी पांढुर्णा में कम बारिश के कारण फसलों के प्रभावित होने और ग्रामीण जल स्रोतों का स्तर घटने की शिकायतें सामने आई थीं। क्षेत्र में विशेष फसल सर्वे की मांग मुख्यमंत्री के दौरे से पहले भी उठ रही थी।
किसानों को देखकर गाड़ी से उतरे मुख्यमंत्री
किसानों के काफिला रोकने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वाहन से उतरे और उनके बीच पहुंचे। किसानों ने उन्हें सूखी फसलें दिखाईं और नुकसान की स्थिति बताई। मुख्यमंत्री ने पांढुर्णा कलेक्टर को फसलों का सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। यह तथ्य पत्रिका, नवभारत टाइम्स और जागरण सहित कई रिपोर्टों में दर्ज है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन नुकसान की वास्तविक स्थिति का आकलन करेगा और सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। कम बारिश वाले क्षेत्रों में सर्वे और प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत देने के निर्देश की पुष्टि दूसरी रिपोर्टों में भी हुई है।
कर्ज से राहत की मांग भी उठी
मौके पर मौजूद किसानों ने खेती पर हुए खर्च और कमजोर फसल के कारण कर्ज चुकाने की समस्या भी मुख्यमंत्री के सामने रखी। कुछ किसानों ने कृषि कर्ज माफ करने या राहत देने की मांग की। उनका कहना था कि बीज, खाद, बिजली और दूसरी लागत पहले ही लग चुकी है, जबकि उत्पादन कम रहने की आशंका बढ़ गई है।
हालांकि अभी पांढुर्णा को सूखाग्रस्त घोषित करने या कृषि कर्ज माफ करने का कोई सरकारी फैसला सामने नहीं आया है। फिलहाल मुख्यमंत्री ने फसल सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। इसलिए खबर में सूखाग्रस्त घोषित करने और कर्ज माफी को किसानों की मांग के रूप में ही लिखना सही रहेगा।
अब किसानों की नजर सर्वे पर
किसानों के लिए अब सबसे अहम सवाल सर्वे का है। वे चाहते हैं कि सर्वे गांव और खेत स्तर पर जल्द शुरू हो, प्रभावित फसलों की वास्तविक स्थिति दर्ज हो और राहत की प्रक्रिया रबी की तैयारी से पहले आगे बढ़े।
खरीफ में नुकसान झेल रहे किसानों के सामने अगली फसल के लिए बीज, खाद, सिंचाई और दूसरे खर्च भी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन का सर्वे और उसके आधार पर सरकार का फैसला तय करेगा कि पांढुर्णा के किसानों को कितनी और कब राहत मिलती है।
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