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₹24 लाख का जॉब ऑफर छोड़ 3.5 एकड़ में की इंटीग्रेटेड फार्मिंग जबलपुर के तन्मय को मिली केन्द्रीय मंत्री अमित शाह से सराहना

अक्टूबर 4, 2026
रिपोर्ट: प्राजंली पातुरकरसंपादन: प्राची मजूमदार चौकसेKisan Culture
भोपाल गोपालक सम्मेलन में तन्मय दास का इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming मॉडल देखते अमित शाह और मुख्यमंत्री मोहन यादव

पढ़ाई के बाद कॉरपोरेट नौकरी चुनने के बजाय खेती में प्रयोग करने वाले तन्मय दास ने फसल, पशुपालन, मत्स्य पालन और पक्षी पालन को एक ही फार्म सिस्टम में जोड़ा है। भोपाल के राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में उनके इसी मॉडल ने ध्यान खींचा और कृषि में किए जा रहे इस प्रयोग को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भी सराहा।

किसान कल्चर, भोपाल: इंजीनियरिंग पूरी की, करीब ₹24 लाख सालाना पैकेज का जॉब ऑफर मिला, लेकिन 21 साल के तन्मय दास ने नौकरी के बजाय खेती को चुना। जबलपुर के पास साढ़े तीन एकड़ जमीन पर उन्होंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming का ऐसा मॉडल तैयार किया, जिसमें जैविक गेहूं-धान की खेती के साथ गाय, बकरी, मुर्गी, मछली और बत्तख पालन को जोड़ा गया है। भोपाल के दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन की विकास प्रदर्शनी में तन्मय का यही मॉडल आकर्षण का केंद्र बना। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मॉडल देखा और तन्मय के इस कृषि प्रयोग की सराहना की।

इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming का मॉडल क्यों है खास

जबलपुर के विजयनगर निवासी तन्मय दास करीब तीन साल से पाटन विकासखंड के ग्राम लम्हेटा में अपनी साढ़े तीन एकड़ कृषि भूमि पर खेती कर रहे हैं।

लेकिन उनकी खेती केवल गेहूं या धान की फसल लेने तक सीमित नहीं है। उन्होंने फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, मत्स्य पालन और बत्तख पालन को एक ही फार्म सिस्टम में जोड़ा है।

यही इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming की सबसे अहम बात है। खेत की अलग-अलग गतिविधियां एक-दूसरे से जुड़ती हैं। पशुओं से निकलने वाला गोबर खेत के लिए खाद बनता है, तालाब का पानी सिंचाई में इस्तेमाल होता है और फसल से मिलने वाले अवशेष दोबारा खेती के काम आते हैं।

इससे किसान केवल एक फसल या कमाई के एक साधन पर निर्भर नहीं रहता।

भोपाल में अमित शाह ने देखा तन्मय का मॉडल

राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में किसान कल्याण वर्ष 2026 पर केंद्रित विकास प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। इसमें तन्मय ने अपने खेत पर अपनाए जा रहे इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming मॉडल का जीवंत स्वरूप प्रस्तुत किया।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान वे तन्मय के मॉडल तक भी पहुंचे।

तन्मय ने उन्हें बताया कि साढ़े तीन एकड़ जमीन में खेती के साथ पशु, पक्षी और मछली पालन को किस तरह जोड़ा गया है। अमित शाह ने उनके इस कृषि प्रयोग की सराहना की।

राज्य स्तरीय मंच पर मिली इस पहचान ने तन्मय के मॉडल को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

इंजीनियरिंग के बाद ₹24 लाख का जॉब ऑफर, फिर चुनी खेती

तन्मय ने इसी साल जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है।

उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि परंपरागत खेती की नहीं है। उनके पिता जबलपुर के विजयनगर में स्कूल संचालित करते हैं और मां उसी स्कूल की प्राचार्य हैं।

कलेक्टर जबलपुर के आधिकारिक फेसबुक पेज पर 11 फरवरी 2026 को पोस्ट किए गए विवरण के अनुसार, तन्मय को ऊर्जा क्षेत्र की एक प्रतिष्ठित कंपनी से करीब ₹24 लाख सालाना पैकेज का जॉब ऑफर मिला था।

तन्मय ने इस ऑफर को स्वीकार करने के बजाय खेती में अपना काम आगे बढ़ाने का फैसला किया।

शुरुआत गिर नस्ल की गाय पालने से हुई। बाद में उन्होंने पाटन विकासखंड के ग्राम लम्हेटा में साढ़े तीन एकड़ जमीन पर अपना इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming मॉडल विकसित करना शुरू किया।

3.5 एकड़ में गेहूं-धान के साथ कमाई के कई रास्ते

तन्मय करीब ढाई एकड़ में जैविक तरीके से गेहूं और धान की खेती करते हैं। इसके साथ गाय पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन और बत्तख पालन को भी जोड़ा गया है।

इसका फायदा यह है कि खेत की कमाई केवल फसल की पैदावार और मंडी भाव पर निर्भर नहीं रहती।

अगर किसी फसल का उत्पादन कमजोर हो या भाव कम मिले तो दूध, मछली, पशुपालन या दूसरी गतिविधियां आय का दूसरा रास्ता बन सकती हैं।

यही इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming को पारंपरिक एकल फसल खेती से अलग बनाता है।

फरवरी में ₹80 हजार महीने की आय होने की कही थी बात

कलेक्टर जबलपुर के आधिकारिक फेसबुक पेज पर 11 फरवरी 2026 को पोस्ट किए गए वीडियो और विवरण में तन्मय ने उस समय अपने फार्म से करीब ₹80,000 प्रति माह आय होने की बात कही थी।

यह आंकड़ा फरवरी 2026 का है। फिलहाल किसान कल्चर का तन्मय से सीधा संपर्क नहीं हो पाया है, इसलिए उनकी मौजूदा मासिक आय की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी है।

इसी वीडियो में तन्मय ने अपनी गौशाला से मिलने वाला दूध ₹100 प्रति लीटर बेचने की बात कही थी। उन्होंने घी की कीमत करीब ₹960 प्रति किलो बताए जाने की बात भी कही थी।

ये कीमतें भी फरवरी में बताए गए आंकड़े हैं। इसलिए इन्हें तन्मय की मौजूदा बिक्री दर नहीं माना जाना चाहिए।

तालाब में मछली और बत्तख, पानी खेत की सिंचाई में

तन्मय ने अपने फार्म पर करीब 10 फुट गहरा छोटा तालाब तैयार किया है। इसमें रोहू और कतला प्रजाति की मछलियां पाली जाती हैं।

तालाब में बत्तख और हंस भी रखे गए हैं। पुराने आधिकारिक विवरण के मुताबिक तालाब के ऊपर बने ढांचे में तीतर और कबूतर पालन की व्यवस्था भी की गई थी।

तन्मय का दावा है कि बत्तख और हंस से निकलने वाला जैविक पदार्थ मछलियों के लिए पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करता है। तालाब के पानी को बाद में खेत की सिंचाई में इस्तेमाल किया जाता है।

इस तरह इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming में तालाब केवल मछली पालन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खेत की पूरी व्यवस्था का हिस्सा बन जाता है।

गिर गाय से दूध भी, खेत के लिए खाद भी

तन्मय ने खेत के करीब एक एकड़ हिस्से में गौशाला भी बनाई है। यहां गिर नस्ल की गायों का पालन किया जाता है।

गाय से मिलने वाले गोबर और गोमूत्र का इस्तेमाल जैविक खाद बनाने में किया जाता है। वहीं दूध से दही, मठा और घी जैसे उत्पाद तैयार किए जाते रहे हैं।

इस मॉडल में पशुपालन केवल दूध बेचने का जरिया नहीं है। पशुओं से मिलने वाला गोबर और गोमूत्र खेती के लिए इनपुट बन जाता है।

यानी एक गतिविधि से निकलने वाला संसाधन दूसरी गतिविधि के काम आता है।

खेत में ही इस्तेमाल होती है धान की पराली

तन्मय धान की कटाई के बाद बची पराली को भी खेत से बाहर करने के बजाय दोबारा खेती के काम में लेने की कोशिश करते हैं।

11 फरवरी को कलेक्टर जबलपुर के आधिकारिक फेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए विवरण के मुताबिक, पराली को खेत में मिलाकर उसके बाद गेहूं की बोनी की जाती है।

इसका मकसद फसल अवशेष को मिट्टी में वापस पहुंचाना और बाहर से खरीदे जाने वाले कुछ कृषि इनपुट पर निर्भरता कम करना है।

तन्मय ने उस समय जैविक खेती और इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming अपनाने के बाद धान का उत्पादन बेहतर होने की बात भी कही थी। हालांकि उपलब्ध विवरण में प्रति एकड़ उत्पादन का आंकड़ा नहीं दिया गया है।

इलाके में रोल मॉडल बन चुकी तन्मय की इंटीग्रेटेड फार्मिंग

तन्मय द्वारा की जा रही इंटीग्रेटेड फार्मिंग जबलपुर एवं आसपास क्षेत्र में अब एक रोल मॉडल की तरह स्थापित हो चुकी है। उनके फार्म पर समय-समय पर विभिन्न प्रशासनिक अधिकारी, कृषि अधिकारी एवं अन्य किसान पहुंचते रहते हैं। सभी से तन्मय के इंटीग्रेटेड फार्मिंग के मॉडल को सराहना मिलती है। उनका फार्म भोपाल के गोपालक सम्मेलन से पहले भी जबलपुर पर चर्चित हो चुका है।

इसी संदर्भ में 11 फरवरी 2026 को जबलपुर कलेक्टर के आधिकारिक फेसबुक पेज पर एक पोस्ट की गई थी, जिसमें अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन डॉ. इंदिरा त्रिपाठी ने उनके सहयोगी कृषि अधिकारियों के साथ तन्मय के खेत का दौरा किया था।

अधिकारियों ने यहां फसल उत्पादन, पशुपालन, तालाब और दूसरी गतिविधियों को जोड़कर तैयार किए गए इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming मॉडल को देखा था।

तन्मय दास के खेत पर इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming मॉडल देखते कृषि अधिकारी
फाइल फोटो: 11 फरवरी 2026 को तन्मय दास के खेत पर इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming मॉडल देखते अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन डॉ. इंदिरा त्रिपाठी और सहयोगी कृषि अधिकारी।

छोटे किसानों के लिए क्या बताता है यह मॉडल

तन्मय के प्रयोग की दिलचस्प बात यह है कि इसे किसी बहुत बड़े फार्म पर नहीं, बल्कि साढ़े तीन एकड़ जमीन पर विकसित किया गया है।

फसल के साथ पशुपालन, मछली, मुर्गी और दूसरी गतिविधियां जोड़ने का मकसद उपलब्ध जमीन और संसाधनों से आय के कई रास्ते तैयार करना है।

हालांकि हर किसान तन्मय के मॉडल को हूबहू नहीं अपना सकता। जमीन, पानी, पशुओं के चारे, तालाब, मजदूरी और स्थानीय बाजार के आधार पर लागत और कमाई अलग-अलग हो सकती है।

तन्मय की वर्तमान मासिक आय, पूरे फार्म की लागत और अलग-अलग गतिविधियों से होने वाले मुनाफे के नए आंकड़े उपलब्ध होने पर मॉडल की आर्थिक तस्वीर और साफ होगी।

फिलहाल साढ़े तीन एकड़ में विकसित इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming मॉडल और भोपाल में मिली सराहना ने इस युवा इंजीनियर की खेती को फिर चर्चा में ला दिया है।

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