Tuesday, March 3, 2026
Homeखेती समाचारगांव-गांव गईं वैज्ञानिकों की 2170 टीमें, किसानों (Farmers) से सीखे इनोवेशन

गांव-गांव गईं वैज्ञानिकों की 2170 टीमें, किसानों (Farmers) से सीखे इनोवेशन

सोयाबीन हितग्राही सम्मेलन में बोले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान – “खेती की बातें अब खेतों से तय होंगी, किसानों (Farmers) की जरूरतें होंगी रिसर्च की दिशा”

Indian Agriculture Innovation gets local boost as scientists adopt grassroots techniques from farmers

इंदौर/नई दिल्ली – भारत में कृषि नवाचार को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत 2170 वैज्ञानिकों की टीमें गांव-गांव पहुंचीं और किसानों (Farmers ) से संवाद कर 300 से अधिक नवाचारों को पहचाना और अपनाया।
इनमें से कई तकनीकों को वैज्ञानिकों ने अपनी शोध प्रक्रिया में शामिल किया है — जैसे लीची की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए उस पर ग्लूकोज का घोल छिड़कना, जो अब agriculture innovation in India का स्थानीय उदाहरण बन चुका है।

यह जानकारी केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर के राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान में आयोजित सोयाबीन हितग्राही सम्मेलन में दी। उन्होंने इस अवसर पर फार्म रिसोर्स हब का शिलान्यास भी किया और खुद ट्रैक्टर चलाकर खेती की वास्तविकता को दर्शाया।

लैब से लैंड तक – किसानों के नवाचारों को वैज्ञानिक मान्यता (Farmers Research Based Solutions)

श्री चौहान ने कहा कि agricultural research in India अब केवल लैब तक सीमित नहीं रहेगी। किसानों की समस्याओं और अनुभवों को ही वैज्ञानिक शोध का आधार बनाया जाएगा। इससे farmers research based solutions को बढ़ावा मिलेगा और शोध ज़मीनी हकीकतों से जुड़ पाएगा।

अमानक बीज और खाद बेचने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई (Agriculture Input Quality Control)

सम्मेलन में यह घोषणा की गई कि अब substandard seeds and pesticides की बिक्री पर सख्त नियंत्रण होगा। किसानों को भ्रमित करने वाले घटिया उत्पादों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही detection tools for farmers तैयार किए जाएंगे, जिससे वे अमानक उत्पादों की पहचान कर सकें।

सोयाबीन की पैदावार बढ़ाने के लिए नई रणनीति (Soybean Yield Improvement and Product Diversification)

बैठक में soybean yield improvement और value addition पर विशेष ज़ोर दिया गया। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि soybean-based products के विविधीकरण से किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी होगी और बाज़ार में मांग भी बढ़ेगी। इसके लिए नई प्रोसेसिंग तकनीकों और फसल प्रबंधन विधियों को विकसित किया जाएगा।

एक देश-एक कृषि-एक टीम का विजन (One Nation One Agriculture Team for India)

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब देश में One Nation-One Agriculture-One Team की सोच को मूर्त रूप दिया जाएगा। इसमें किसान, वैज्ञानिक, नीति निर्माता और उद्योग जगत सभी मिलकर agriculture collaboration model in India तैयार करेंगे। इससे रिसर्च, नीति और क्रियान्वयन में बेहतर तालमेल स्थापित होगा।

आधुनिक कृषि के लिए जीनोम एडिटिंग का उपयोग (Genome Editing in Agriculture for Crop Protection)

बैठक में निर्णय लिया गया कि genome editing in agriculture जैसी आधुनिक तकनीकों को अब भारतीय खेती में तेजी से अपनाया जाएगा। इसका उद्देश्य फसलों की बीमारियों से सुरक्षा और उत्पादन क्षमता में वृद्धि करना है। यह कदम precision agriculture solutions in India की दिशा में एक बड़ी शुरुआत माना जा रहा है।

किसानों के साथ सतत संवाद से बनेगा भविष्य:- (Continuous Farmer-Scientist Interaction)

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वे हर सप्ताह दो दिन किसानों के बीच बिताएंगे। किसानों के अनुभवों और समस्याओं से जुड़कर ही agriculture policy in India को व्यवहारिक बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही agriculture roadmap for India पेश किया जाएगा जो खेती और किसानों दोनों की स्थिति को सशक्त बनाएगा।

सम्मेलन में शामिल हुए कृषि क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधि:-

सोयाबीन हितग्राही सम्मेलन (Soybean Beneficiary Conference) में भारत के कृषि क्षेत्र (agriculture sector in India) से जुड़े कई प्रमुख विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने सहभागिता की। इस अवसर पर महाराष्ट्र के कृषि मंत्री मानिकराव कोकाटे, सांसद शंकर लालवानी, तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research – ICAR) के महानिदेशक (Director General) और शीर्ष कृषि वैज्ञानिक (agricultural scientists) उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त, देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों (agricultural universities) के कुलपति और विषय विशेषज्ञ, साथ ही राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर (National Soybean Research Institute, Indore) के निदेशक डॉ. कुंवर हरेंद्र सिंह ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी दी। सम्मेलन में किसान प्रतिनिधि (farmer representatives) और सोया उद्योग (soy industry stakeholders) से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञों ने भी अपने अनुभव और field-level innovations साझा किए।

इस व्यापक सहभागिता ने सम्मेलन को एक multi-stakeholder agricultural platform के रूप में स्थापित किया, जहां नीति, विज्ञान और व्यवहारिक खेती (policy, science and practical farming) को एक साझा मंच पर लाकर Indian agriculture collaboration की दिशा में मजबूत पहल की गई।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments