⌖ भोपाल▤ ई-पेपर
आज का भाव LIVEसोयाबीन 4520 ₹/क्विंटल गेहूं 2425 ₹/क्विंटल चना 5650 ₹/क्विंटल

अच्छी खबर : रीट्रेडेड ट्रैक्टर टायर पर GST 18% से 5% करने की सिफारिश, जानिए किसानों को कितनी होगी बचत…

अक्टूबर 9, 2026
रिपोर्ट: सुमित श्रीवास्तवसंपादन: डॉ. सुदीप शुक्लKisan Culture
ट्रैक्टर टायर GST में कटौती से भारतीय किसानों को संभावित राहत

ट्रैक्टर टायर GST (Tractor Tyre) में कटौती से किसानों को राहत मिल सकती है। 8 अक्टूबर को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई GST काउंसिल की 57वीं बैठक में रीट्रेडेड ट्रैक्टर टायरों पर टैक्स 18% से घटाकर 5% करने की सिफारिश की गई है। इससे ₹10,000 के टायर पर ₹1,300 की संभावित बचत होगी। बैठक में बीज भंडारण और कुछ अन्य कृषि उत्पादों को भी टैक्स राहत देने की सिफारिश की गई है।

किसान कल्चर, नई दिल्ली: ट्रैक्टर के घिसे हुए टायरों को दोबारा तैयार करवाने वाले किसानों के लिए राहत की खबर है। GST काउंसिल ने रीट्रेडेड ट्रैक्टर टायरों पर टैक्स 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने की सिफारिश की है। नई दर लागू होने के बाद ₹10,000 की मूल कीमत वाले टायर पर किसान को ₹1,300 की बचत हो सकती है।

8 अक्टूबर को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई 57वीं GST काउंसिल की बैठक में बुवाई के बीजों के भंडारण को GST मुक्त करने, समुद्री शैवाल से बने पंजीकृत बायो-स्टिमुलेंट के टैक्स वर्गीकरण में स्पष्टता और ईसबगोल के बीजों पर शून्य GST की सिफारिश भी की गई। लेकिन किसानों को यह राहत बाजार में कब मिलेगी और टायर की कीमत वास्तव में कितनी घटेगी?

रीट्रेडेड ट्रैक्टर टायर पर अब 5% GST की सिफारिश, छोटे किसानों को फायदा

खेती की लागत बढ़ने के बीच ट्रैक्टर के टायर बदलना किसानों के लिए बड़ा खर्च होता है। नया टायर महंगा पड़ने पर बहुत से किसान पुराने टायर को दोबारा तैयार करवाना पसंद करते हैं।

इस प्रक्रिया को रीट्रेडिंग कहते हैं। इसमें टायर के पुराने और घिसे हुए हिस्से पर नई रबर की परत लगाई जाती है। इससे टायर को दोबारा इस्तेमाल करने लायक बनाया जाता है, हालांकि यह तभी सुरक्षित होता है जब टायर की मूल संरचना ठीक हो।

सितंबर 2025 में GST सुधारों के तहत नए ट्रैक्टर टायरों पर टैक्स घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया था। लेकिन रीट्रेडेड ट्रैक्टर टायरों पर 18 प्रतिशत GST लगने से दोनों की टैक्स दरों में अंतर बना हुआ था।

अब 57वीं GST काउंसिल ने इस अंतर को समाप्त करने की सिफारिश की है। आधिकारिक विज्ञप्ति में रीट्रेडेड ट्रैक्टर टायरों की GST दर नए ट्रैक्टर टायरों के बराबर करने की बात कही गई है। इसका अर्थ 5 प्रतिशत की दर से है।

₹10,000 के टायर पर कितनी होगी बचत? समझिए पूरा गणित

अगर किसी किसान को ₹10,000 कीमत का रीट्रेडेड ट्रैक्टर टायर खरीदना है, तो मौजूदा 18% GST के हिसाब से उसे कुल ₹11,800 चुकाने पड़ते हैं, क्योंकि इसमें ₹1,800 टैक्स जुड़ता है।

यदि GST दर 5% हो जाती है, तो उसी टायर की कुल कीमत ₹10,500 रह जाएगी, यानी टैक्स सिर्फ ₹500 होगा। इस तरह एक टायर पर किसान की संभावित बचत ₹1,300 हो सकती है।

अगर कोई किसान ऐसे दो टायर खरीदता है, तो उसकी कुल बचत ₹2,600 तक पहुंच सकती है। हालांकि यह गणित इस आधार पर है कि टायर की मूल कीमत समान रहे और टैक्स में कटौती का पूरा लाभ ग्राहक तक पहुंचे।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि 18% से 5% होने का मतलब टैक्स दर में 13 प्रतिशत अंक की कमी है, लेकिन अंतिम बिक्री कीमत उतनी ही प्रतिशत से कम हो जाए, यह जरूरी नहीं है।

वास्तविक बचत टायर की मूल कीमत, विक्रेता की मूल्य नीति और नई दर लागू होने की तारीख पर निर्भर करेगी।

ट्रैक्टर टायर GST में 18% से 5% कटौती की सिफारिश, ₹10,000 के रीट्रेडेड टायर पर ₹1,300 की संभावित बचत का गणित
रीट्रेडेड ट्रैक्टर टायर पर GST 18% से 5% करने की सिफारिश। ₹10,000 की मूल कीमत वाले टायर पर किसान को ₹1,300 की संभावित बचत हो सकती है। ग्राफिक्स: किसान कल्चर।

रीट्रेडेड टायर क्या होता है और किसान इसे क्यों खरीदते हैं?

ट्रैक्टर का टायर लगातार खेत की मिट्टी, कच्ची सड़कों और कृषि परिवहन में इस्तेमाल होता है। समय के साथ उसकी पकड़ बनाने वाली बाहरी रबर घिस जाती है।

यदि टायर की अंदरूनी संरचना अच्छी स्थिति में है तो विशेष प्रक्रिया के जरिए उस पर नई रबर चढ़ाई जा सकती है। इसे रीट्रेडिंग कहा जाता है।

इसका मुख्य फायदा यह है कि किसान को हर बार बिल्कुल नया टायर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। कुछ परिस्थितियों में रीट्रेडिंग नया टायर खरीदने के मुकाबले किफायती हो सकती है।

हालांकि हर पुराना टायर रीट्रेडिंग के योग्य नहीं होता। यदि टायर की संरचना क्षतिग्रस्त है तो उसे दोबारा इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है। किसानों को विश्वसनीय रीट्रेडिंग सेवा से ही काम करवाना चाहिए।

GST में प्रस्तावित कमी ऐसे किसानों के लिए महत्वपूर्ण है जो कृषि परिवहन या खेत की तैयारी में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टरों के रखरखाव पर कम खर्च करना चाहते हैं।

बीज भंडारण पर GST खत्म करने की सिफारिश, किसानों तक कैसे पहुंचेगी राहत?

GST काउंसिल ने बुवाई के लिए इस्तेमाल होने वाले बीजों के भंडारण और वेयरहाउसिंग सेवाओं को GST से मुक्त करने की सिफारिश की है।

खेती में बीज की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उसका सुरक्षित भंडारण जरूरी है। बीज को नमी, तापमान और कीटों से बचाने के लिए कई बार विशेष गोदामों की सेवाएं लेनी पड़ती हैं।

इन सेवाओं की लागत बीज उत्पादन और वितरण की पूरी व्यवस्था को प्रभावित करती है।

GST छूट लागू होने पर पात्र भंडारण सेवाओं का कर खर्च घट सकता है। इसका फायदा बीज उत्पादक कंपनियों, सहकारी संस्थाओं और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को मिल सकता है।

आगे चलकर यदि कंपनियां लागत में आई कमी का लाभ खरीदारों तक पहुंचाती हैं तो किसानों को भी राहत मिल सकती है।

वित्त मंत्रालय की 8 अक्टूबर की आधिकारिक विज्ञप्ति में स्पष्ट रूप से बुवाई के लिए बीजों की भंडारण और वेयरहाउसिंग सेवाओं को GST से छूट देने की सिफारिश दर्ज है।

समुद्री शैवाल वाले बायो-स्टिमुलेंट को उर्वरक की श्रेणी में रखने की सिफारिश

GST काउंसिल ने समुद्री शैवाल के अर्क से तैयार उन बायो-स्टिमुलेंट उत्पादों के टैक्स वर्गीकरण को भी स्पष्ट करने की सिफारिश की है, जो उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 की अनुसूची छह के तहत पंजीकृत हैं।

काउंसिल ने ऐसे उत्पादों को उर्वरक की श्रेणी में रखने की बात कही है। इससे पात्र उत्पादों पर 5 प्रतिशत GST की दर स्पष्ट होने का रास्ता खुलेगा। इससे पहले कुछ मामलों में इन उत्पादों पर 18 प्रतिशत टैक्स लगने की स्थिति रही है।

बायो-स्टिमुलेंट ऐसे उत्पाद होते हैं जो पौधों को उपलब्ध पोषक तत्वों का बेहतर इस्तेमाल करने और कुछ पर्यावरणीय दबावों का सामना करने में मदद कर सकते हैं।

लेकिन सभी बायो-स्टिमुलेंट एक जैसे नहीं होते। किसान को खरीदारी से पहले उत्पाद का पंजीकरण, उपयोग की मात्रा और संबंधित फसल के लिए उसकी उपयुक्तता जरूर देखनी चाहिए।

ईसबगोल के बीज पर शून्य GST, कॉफी किसानों को भी राहत

काउंसिल ने ईसबगोल यानी Psyllium के बीजों पर GST के संबंध में भी स्पष्टता लाने की सिफारिश की है।

आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक ईसबगोल के बीज चाहे ताजा हों, ठंडे रखे गए हों, फ्रीज किए गए हों या सूखे हों, उन पर शून्य GST दर निर्धारित करने की सिफारिश है।

इससे ईसबगोल के कारोबार में अलग-अलग अवस्थाओं के आधार पर टैक्स संबंधी भ्रम कम हो सकता है।इसी बैठक में किसानों को दी जाने वाली कॉफी क्योरिंग सेवाओं को GST से मुक्त करने की सिफारिश की गई। कॉफी क्योरिंग में कॉफी को आगे के प्रसंस्करण और बाजार के लिए तैयार किया जाता है।

इस बदलाव से पात्र कॉफी उत्पादकों के प्रसंस्करण खर्च में राहत की संभावना है।

मध्यप्रदेश के किसानों के लिए कितना महत्वपूर्ण है फैसला?

मध्यप्रदेश में गेहूं, चना, सोयाबीन, मक्का और दूसरी फसलों की खेती में ट्रैक्टर महत्वपूर्ण कृषि मशीन है। खेत की जुताई से लेकर बुवाई की तैयारी और उपज के परिवहन तक इसका उपयोग होता है।

ट्रैक्टर के पुराने टायरों को रीट्रेड करवाने वाले किसानों के लिए टैक्स में कटौती सीधे रखरखाव खर्च से जुड़ी है।

खासकर छोटे और मध्यम जोत वाले किसानों के लिए कृषि मशीनरी पर होने वाले खर्च का महत्व ज्यादा है। कई किसान ट्रैक्टर का इस्तेमाल अपनी खेती के अलावा किराये पर कृषि कार्यों में भी करते हैं।

ऐसे में रीट्रेडेड टायर की लागत घटने से उन्हें आर्थिक राहत मिल सकती है। हालांकि इससे ट्रैक्टर किराये की दरें घटेंगी या नहीं, यह स्थानीय लागत और सेवा प्रदाताओं के निर्णय पर निर्भर करेगा।

बीज भंडारण से जुड़ी सिफारिश का महत्व भी मध्यप्रदेश के लिए है। प्रदेश में रबी सीजन की तैयारियों के दौरान गेहूं और चने जैसे बीजों की मांग बढ़ती है।

यदि पात्र बीज भंडारण सेवाएं सस्ती होती हैं तो बीज उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था के कुछ हिस्सों में लागत कम हो सकती है। इसका लाभ अंतिम किसान तक पहुंचेगा या नहीं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

किसानों को सस्ते टायर कब से मिलने लगेंगे?

फिलहाल सबसे जरूरी सवाल नई GST दर लागू होने की तारीख का है।

GST काउंसिल ने 8 अक्टूबर की बैठक में टैक्स संबंधी सिफारिशें की हैं। लेकिन सिफारिश होने और किसी नई दर के कानूनी रूप से लागू होने में अंतर है।

वित्त मंत्रालय ने अपनी विज्ञप्ति में स्पष्ट किया है कि सिफारिशों को संबंधित अधिसूचनाओं, परिपत्रों या कानून संशोधनों के जरिए प्रभावी किया जाएगा। कानूनी मान्यता इन्हीं दस्तावेजों को मिलेगी।

इसलिए किसानों को अभी यह मानकर खरीदारी नहीं करनी चाहिए कि सभी दुकानों पर रीट्रेडेड ट्रैक्टर टायर पर 5 प्रतिशत GST लगने लगा है।

खरीदारी से पहले विक्रेता से प्रभावी GST दर पूछें और पक्का बिल लें। बिल में उत्पाद का नाम, मूल कीमत और टैक्स की दर जरूर जांचें।

किसानों के लिए इस फैसले की वास्तविक सफलता तब होगी जब टैक्स में प्रस्तावित कमी बाजार की कीमतों में भी दिखाई दे।