जमीन कम है तो भी इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming से बढ़ा सकते हैं खेती की कमाई

एक ही फसल पर निर्भर छोटे किसानों के लिए मौसम, लागत और बाजार भाव का जोखिम ज्यादा रहता है। इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming में फसल के साथ डेयरी, सब्जी, बागवानी, चारा या वर्मी कम्पोस्ट जैसी गतिविधियों को जोड़कर आय के अलग-अलग स्रोत तैयार किए जा सकते हैं। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक वीरेन्द्र जैन के अनुसार, सही मॉडल वही है जो किसान की जमीन, पानी, श्रम और स्थानीय बाजार के हिसाब से तैयार किया जाए।
Table of Contents
किसान कल्चर, भोपाल/अशोकनगर: खेती से ज्यादा कमाई के लिए हमेशा ज्यादा जमीन जरूरी नहीं होती। छोटी जोत वाला किसान भी फसल के साथ डेयरी, सब्जी, बागवानी, चारा उत्पादन, नर्सरी या वर्मी कम्पोस्ट जैसी गतिविधियों को जोड़कर अपनी जमीन से आय के कई रास्ते बना सकता है। इसी तरीके को इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming कहा जाता है। इसमें खेत का एक संसाधन दूसरे काम में इस्तेमाल होता है, जिससे जमीन का बेहतर उपयोग होता है और किसान की कमाई केवल एक फसल के भरोसे नहीं रहती।
इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming क्या है?
इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming ऐसी खेती है जिसमें मुख्य फसल के साथ दूसरी कृषि गतिविधियों को इस तरह जोड़ा जाता है कि वे एक-दूसरे के काम आ सकें।
मसलन, किसान गेहूं, धान, चना या दूसरी फसल लेता है और उसके पास एक-दो दुधारू पशु भी हैं। पशुओं से मिलने वाला गोबर कम्पोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। खेत में उगाया गया चारा पशुओं के काम आता है और तैयार जैविक खाद फिर उसी खेत में इस्तेमाल की जा सकती है।
इसी तरह फसल के साथ सब्जी, फलदार पौधे, नर्सरी या चारा उत्पादन जोड़ने पर एक ही खेत में अलग-अलग समय पर उत्पादन और आय के अवसर तैयार हो सकते हैं।
इंटीग्रेटेड फार्मिंग का मतलब खेत में ज्यादा से ज्यादा गतिविधियां भर देना नहीं है। असली बात यह है कि किसान ऐसे काम चुने जो उसकी जमीन, पानी और बाजार के हिसाब से आपस में जुड़ सकें।

कम जमीन वाले किसान के लिए क्यों उपयोगी है यह मॉडल?
राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक वीरेन्द्र जैन के अनुसार, छोटे किसान के लिए जमीन के आकार से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है।
एक या दो एकड़ जमीन वाला किसान अगर सिर्फ एक फसल पर निर्भर है तो उसकी आमदनी उसी फसल की पैदावार और बाजार भाव से जुड़ी रहेगी। मौसम खराब हुआ, उत्पादन घटा या भाव कमजोर मिले तो पूरी कमाई प्रभावित हो सकती है।
इसके मुकाबले इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming में मुख्य फसल के साथ दूसरी गतिविधि जोड़ने से आय का दूसरा रास्ता तैयार किया जा सकता है।
दूध नियमित आय दे सकता है। सब्जी अलग समय पर बाजार में पहुंच सकती है। फलदार पौधों से लंबी अवधि में उत्पादन मिलता है और वर्मी कम्पोस्ट का इस्तेमाल खेत में करने के साथ स्थानीय मांग होने पर इसकी बिक्री भी की जा सकती है।
एक-दो एकड़ में कैसे शुरू करें Integrated Farming?
छोटे किसान को शुरुआत में बहुत बड़ा मॉडल बनाने की जरूरत नहीं है।
अगर किसान पहले से फसल ले रहा है और घर में एक-दो दुधारू पशु हैं तो फसल + डेयरी + जैविक खाद से शुरुआत की जा सकती है।
जिस किसान के पास सिंचाई की अच्छी सुविधा है, वह मुख्य फसल के साथ जमीन के छोटे हिस्से में मौसमी सब्जियां लगा सकता है।
खेत की मेड़ों पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल फलदार या उपयोगी पौधे लगाए जा सकते हैं। इससे मुख्य फसल की जमीन को बहुत ज्यादा प्रभावित किए बिना अतिरिक्त उत्पादन का रास्ता बन सकता है।
अगर आसपास पौधों की मांग है तो छोटी नर्सरी भी Integrated Farming Model का हिस्सा बनाई जा सकती है।
पहले जमीन नहीं, अपने संसाधनों का हिसाब करें
इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming शुरू करने से पहले किसान को अपनी परिस्थितियों का आकलन करना जरूरी है।
वीरेन्द्र जैन के अनुसार किसान को मुख्य रूप से जमीन, पानी, उपलब्ध श्रम और बाजार को देखकर अपना मॉडल तय करना चाहिए।
किसी किसान के पास पानी पर्याप्त है, लेकिन परिवार में रोज पशुओं की देखभाल करने वाला कोई नहीं है तो बड़ा डेयरी मॉडल उसके लिए मुश्किल हो सकता है।
इसी तरह किसान सब्जी उगा सकता है, लेकिन अगर आसपास बाजार नहीं है या उत्पाद समय पर बेचने की व्यवस्था नहीं है तो बेहतर उत्पादन के बावजूद फायदा सीमित रह सकता है।
इसलिए Integrated Farming की योजना खेत से शुरू होकर बाजार तक जानी चाहिए।
डेयरी को खेती से जोड़ने पर बन सकता है पूरा चक्र
छोटे किसानों के लिए डेयरी और फसल को जोड़ना एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।
खेत के एक हिस्से में पशुओं के लिए चारा पैदा किया जा सकता है। पशुओं से मिलने वाला गोबर कम्पोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट में जा सकता है। तैयार खाद खेत और सब्जियों में इस्तेमाल की जा सकती है।
इससे किसान को दूध से नियमित आय मिलने की संभावना रहती है और खेत के लिए जैविक खाद भी तैयार होती है।
लेकिन डेयरी जोड़ने से पहले पशु खरीदने की कीमत, चारा, पानी, इलाज, श्रम और दूध की बिक्री का हिसाब जरूर करना चाहिए।
केवल दूध की ऊंची कीमत देखकर पशु खरीदना Integrated Farming की सही योजना नहीं मानी जा सकती।
वर्मी कम्पोस्ट से खेत के संसाधनों का दोबारा इस्तेमाल
इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming में resource recycling महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
पशुओं का गोबर और उपयुक्त जैविक पदार्थ वर्मी कम्पोस्ट या कम्पोस्ट बनाने में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। तैयार खाद खेत में डालने से जैविक पदार्थ वापस मिट्टी तक पहुंचता है।
अगर किसान जरूरत से ज्यादा वर्मी कम्पोस्ट तैयार करता है और स्थानीय बाजार में मांग है तो इसे आय के एक छोटे स्रोत के रूप में भी विकसित किया जा सकता है।
इसका फायदा यह है कि खेत से निकलने वाली चीजों को कचरा मानकर हटाने के बजाय उन्हें farm cycle में दोबारा इस्तेमाल किया जाता है।
सब्जी और बागवानी से एक ही खेत से अलग-अलग समय पर आय
छोटे किसान के लिए सब्जी उत्पादन इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming का उपयोगी हिस्सा बन सकता है।
मुख्य फसल के साथ खेत के छोटे हिस्से में मौसम के हिसाब से सब्जियां लगाई जा सकती हैं। इससे मुख्य फसल तैयार होने से पहले भी कुछ नकदी आने की संभावना बनती है।
खेत की मेड़ों पर फलदार पौधे लगाने से उपलब्ध जगह का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
लेकिन यहां भी फसल का चुनाव स्थानीय बाजार देखकर होना चाहिए। महंगी फसल जरूरी नहीं कि सबसे ज्यादा फायदा दे। जो उत्पाद आसपास आसानी से बिकता है, वह छोटे किसान के लिए ज्यादा व्यावहारिक साबित हो सकता है।
किसी दूसरे किसान का मॉडल हूबहू कॉपी न करें
Integrated Farming में सबसे जरूरी बात यही है कि हर किसान का मॉडल अलग हो सकता है।
किसी सफल किसान के खेत पर पांच गतिविधियां चल रही हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि दूसरे किसान को भी वही पांच काम शुरू कर देने चाहिए।
कहीं पानी ज्यादा है, कहीं कम। किसी इलाके में दूध का अच्छा बाजार है तो किसी जगह सब्जियों की मांग ज्यादा हो सकती है। मिट्टी, मौसम और उपलब्ध श्रम भी अलग-अलग होता है।
इसलिए किसी किसान के लिए फसल + डेयरी + सब्जी बेहतर हो सकता है तो दूसरे के लिए फसल + बागवानी + वर्मी कम्पोस्ट + नर्सरी ज्यादा उपयोगी हो सकती है।
पहले छोटा मॉडल बनाएं, फिर बढ़ाएं
वीरेन्द्र जैन के अनुसार छोटे किसान के लिए चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ना ज्यादा व्यावहारिक है।
किसान अपनी मौजूदा खेती के साथ पहले एक अतिरिक्त गतिविधि जोड़ सकता है। एक-दो सीजन तक उसकी लागत, उत्पादन, मेहनत और बिक्री को समझे।
अगर वह गतिविधि सफल रहती है तो अगला component जोड़ा जा सकता है।
इससे शुरुआती निवेश का जोखिम कम रहता है और किसान को यह समझने का समय मिलता है कि उसके खेत के लिए कौन सा combination वास्तव में काम कर रहा है।
कम जमीन में ज्यादा गतिविधि नहीं, बेहतर तालमेल जरूरी
इंटीग्रेटेड फार्मिंग Integrated Farming का उद्देश्य केवल एक खेत में बहुत सारे काम करना नहीं है।
इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि किसान खेती, डेयरी, सब्जी, बागवानी, चारा और जैविक खाद जैसी गतिविधियों को कितनी समझदारी से जोड़ता है।
छोटे किसान शुरुआत से पहले अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विभाग के विशेषज्ञों से भी सलाह ले सकते हैं। इससे जमीन, मिट्टी, पानी और स्थानीय बाजार के हिसाब से बेहतर मॉडल तैयार किया जा सकता है।
कम जमीन वाले किसान के लिए Integrated Farming की सबसे बड़ी संभावना यही है कि उसी खेत से अलग-अलग समय पर उत्पादन और आय के कई रास्ते तैयार किए जाएं, जबकि उपलब्ध संसाधनों का बार-बार और बेहतर इस्तेमाल हो।



