नया सीड बिल ऐसे समय आ रहा है, जब देश में करीब 70% बीज मौजूदा कानून की प्रभावी निगरानी से बाहर हैं। किसान के हाथ नकली या घटिया बीज लग जाए तो सिर्फ बीज का पैसा नहीं, पूरी फसल और सीजन की मेहनत दांव पर लग जाती है। इसी खाई को भरने के लिए केंद्र नया कानून तैयार कर रहा है, जिस पर अब तक 18 हजार से ज्यादा सुझाव मिल चुके हैं।
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किसान कल्चर, (प्रांजलि पातुरकर) नई दिल्ली : नया सीड बिल ऐसे समय आ रहा है, जब देश में करीब 70% बीज मौजूदा कानून की प्रभावी निगरानी से बाहर हैं। किसान के हाथ नकली या घटिया बीज लग जाए तो सिर्फ बीज का पैसा नहीं, पूरी फसल और सीजन की मेहनत दांव पर लग सकती है। इसी खाई को भरने के लिए केंद्र नया कानून तैयार कर रहा है, इसके मसादे के लिए अब तक 18 हजार से ज्यादा सुझाव मिल चुके हैं।
बीते गुरुवार नई दिल्ली के कृषि भवन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के करीब 20 प्रमुख किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ प्रस्तावित बीज कानून पर चर्चा की। किसान प्रतिनिधियों ने बीज की गुणवत्ता, स्थानीय किस्मों, पंजीकरण और खराब बीज बेचने वालों की जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठाए।
चौहान ने कहा कि किसान संगठनों से मिले व्यावहारिक सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। जो सुझाव किसानों के हित और जमीनी जरूरतों के अनुरूप होंगे, उन्हें विधेयक के अंतिम मसौदे में शामिल किया जाएगा।
नया सीड बिल क्यों लाना चाहती है सरकार
सरकार का मानना है कि मौजूदा बीज कानून तेजी से बदलते बीज बाजार और उसकी चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है। राज्यों में बीजों से जुड़ी प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं और नकली या खराब गुणवत्ता के बीज बेचने वालों के खिलाफ मौजूदा कार्रवाई को भी ज्यादा प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। किसान के लिए बीज खेती की पहली और सबसे अहम कड़ी है। खराब बीज मिलने पर सिर्फ शुरुआती लागत ही नहीं डूबती, बल्कि खाद, सिंचाई, मजदूरी और पूरे फसल चक्र पर असर पड़ सकता है। इसीलिए नया सीड बिल बीज की गुणवत्ता और बाजार में उसकी जवाबदेही को मजबूत करने पर केंद्रित है।
70 प्रतिशत बीज मौजूदा कानून के दायरे से बाहर
बैठक में कन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि करीब 70 प्रतिशत बीज मौजूदा बीज कानून के दायरे से बाहर हैं। सरकार इसे मौजूदा व्यवस्था की बड़ी कमजोरी मान रही है। उन्होंने कहा कि खराब बीज मिलने पर कई किसानों के लिए शिकायत करना, उसकी जांच करवाना और जिम्मेदारी तय कराना आसान नहीं होता। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि नए बीज कानून के जरिए बीज की गुणवत्ता, उसकी पहचान और बिक्री से जुड़ी जवाबदेही को अधिक स्पष्ट करने की तैयारी है।
नया सीड बिल पर मिले 18 हजार से ज्यादा सुझाव
नया सीड बिल में आम जन और किसानों की सहभागिता रहे, इसी मंशा के साथ सरकार ने नवंबर-दिसंबर 2025 में प्रस्तावित विधेयक के मसौदे पर किसानों, किसान संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे थे।चौहान के मुताबिक, इस प्रक्रिया में 18 हजार से ज्यादा सुझाव सरकार को मिले हैं। अब इन सुझावों का अध्ययन किया जा रहा है। बीते गुरुवार किसान संगठनों के साथ हुई बैठक भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा थी, ताकि कानून बनाने से पहले खेत और बाजार की वास्तविक समस्याओं को समझा जा सके।
पारंपरिक बीजों पर नहीं लगेगी पाबंदी
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान यह सामने आया कि प्रस्तावित सीड बिल को लेकर किसान संगठनों की चिंता थी कि उनके पारंपरिक और स्थानीय बीजों पर इस कानून का क्या असर होगा। किसानों के इस संशय पर श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कानून से किसानों के पारंपरिक बीज इस्तेमाल करने या आपस में उनका आदान-प्रदान करने के अधिकार पर कोई रोक नहीं लगेगी। उन्होंने बताया कि पारंपरिक बीजों का पंजीकरण भी अनिवार्य नहीं होगा। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि अगर कोई किसान उनके द्वारा विकसित बीज की किसी विशेष किस्म का पंजीकरण करवाना चाहे तो वह अपनी इच्छा से ऐसा कर सकेगा। यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों में किसान पीढ़ियों से स्थानीय मौसम, मिट्टी और खेती की जरूरतों के अनुरूप बीज किस्मों को संरक्षित करते आए हैं।
नकली और घटिया बीज बेचने वालों पर सख्ती
सरकार का मानना है कि मौजूदा दंड व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। नए कानून में गलत गुणवत्ता, गलत लेबलिंग या निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वालों की जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रस्तावित नया सीड बिल का एक प्रमुख उद्देश्य नकली और घटिया बीजों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाना है। हालांकि सजा और जुर्माने के अंतिम प्रावधान विधेयक का अंतिम मसौदा सामने आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
तकनीक से आसान हो सकती है बीज की पहचान
सरकार बाजार में बीज की traceability बढ़ाने पर भी काम कर रही है। प्रस्ताव है कि तकनीक के जरिए यह पता लगाना कि किसान तक पहुंचा बीज किस कंपनी या स्रोत से पहुंचा, इसे आसान बनाया जाएगा। बैठक में बताया गया कि ऐसी व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो खराब बीज की शिकायत की स्थिति में उसके स्रोत और जिम्मेदार पक्ष तक पहुंचना आसान हो सकता है।
किसान संगठनों से जारी रहेगा संवाद
बैठक में भारतीय किसान संघ, भारतीय किसान यूनियन के विभिन्न समूहों, किसान महापंचायत और कई राज्यों के किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सरकार ने संकेत दिया है कि विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले किसान संगठनों से संवाद आगे भी जारी रहेगा। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि कानून का उद्देश्य किसानों पर नई पाबंदियां लगाना नहीं, बल्कि उन्हें नकली और खराब बीज से होने वाले नुकसान से बचाना है।
अब नए सीड बिल की असली परीक्षा इस बात से होगी कि अंतिम कानून खराब बीज की शिकायत पर किसान को कितनी जल्दी राहत देता है और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही कितनी प्रभावी तरीके से तय करता है।






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