नारियल चिप्स बिजनेस: 62 वर्ष में अन्नम्मा की Success Story

टी. एम. अन्नम्मा का नारियल चिप्स बिजनेस, नारियल और packaged coconut chips products के साथ

न खेती छोड़ी, न नई फसल बोई, बस नारियल को रेडी-टू-ईट चिप्स में बदलकर एक 62 वर्षीय महिला ने एग्री-बिजनेस की नई इबारत लिख दी। जानिए कैसे सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद अन्नम्मा ने खड़ा किया ‘Bless Farm Flave’ और कासरगोड के नारियल को भारतीय रेलवे का आधिकारिक OSOP प्रॉडक्ट बना दिया।

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किसान कल्चर, स्टार्टअप डेस्क। नारियल चिप्स बिजनेस की यह प्रेरक कहानी केरल की 62 वर्षीय अन्नम्मा की है, जिन्होंने रिटायरमेंट के बाद कोकोनट को रेडी-टू-ईट स्नैक में बदलकर नया स्टार्टअप खड़ा किया। नारियल वही था, खेत वही थे और बाजार की चुनौतियां भी वही। बदला तो केवल उपज को बाजार तक पहुंचाने का नजरिया। केरल के कासरगोड की 62 वर्षीय टी.एम. अन्नम्मा ने साबित किया कि पारंपरिक खेती में वैल्यू एडिशन (Value Addition) जोड़ दिया जाए, तो सामान्य उपज से नारियल चिप्स बनाने का साधारण बिजनेस भी प्रीमियम ब्रांड बन सकती है।

केंद्र सरकार की नौकरी से रिटायर होने के बाद अन्नम्मा ने घर बैठने के बजाय नारियल चिप्स बिजनेस (Coconut Chips Business) की नींव रखी। उन्होंने Bless Farm Flave नाम से अपना एग्री-ब्रांड शुरू किया, जो आज 20% प्रॉफिट मार्जिन के साथ चल रहा है और 6 स्थानीय लोगों (जिनमें 4 महिलाएं हैं) को नियमित रोजगार दे रहा है।

Sucess Story : नारियल चिप्स बिजनेस की शुरुआत रिटायरमेंट के बाद

कासरगोड देश का प्रमुख नारियल उत्पादक क्षेत्र है। यहां किसानों की सबसे बड़ी समस्या कच्चे नारियल के औने-पौने दाम और बिचौलियों पर निर्भरता थी।

रिटायरमेंट के बाद अन्नम्मा एक ऐसा टिकाऊ मॉडल चाहती थीं, जिससे कृषि उपज की कीमत बढ़े और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिले। उन्होंने बाजार की नब्ज पहचानी: कच्चा नारियल बेचना घाटे का सौदा हो सकता है, लेकिन नारियल को यदि हेल्दी ‘रेडी-टू-ईट’ (Ready-to-Eat) स्नैक बना दिया जाए, तो शहरी और स्वास्थ्य-सचेत ग्राहकों से बेहतर कीमत मिल सकती है। बस उनकी इसी सोच ने उन्हें ब्रांडेड नारियल चिप्स बिजनेस शुरू करने की प्रेरणा दी।

नारियल चिप्स बिजनेस में अन्नम्मा ने कैसे जोड़ी वैल्यू

किसी भी फूड प्रोसेसिंग बिजनेस (Food Processing Business) में स्वाद, शेल्फ लाइफ और हाइजीन सबसे अहम पहलू हैं। पारंपरिक तरीके अपनाने के बजाय अन्नम्मा ने वैज्ञानिक पद्धति का चुनाव किया। इसके लिए उन्होंने ICAR: Indian Council of Agricultural Research (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) CPCRI: Central Plantation Crops Research Institute (केंद्रीय रोपण फसल अनुसंधान संस्थान) का सहयोग लिया। ICAR-CPCRI कासरगोड के स्थानीय अधियकारियों ने अन्नम्मा के लिए ट्रेनिंग के साथ ही तकनीकी सपोर्ट भी किया। इसका ही नतीजा रहा कि अन्नम्मा का नारियल चिप्स बिजनेस का स्टार्टअप सफल हो सका। बिंदुओं के जरिए, जानिए अन्नम्मा की सफलता में ICAR-CPCRI ने कैसे मदद की।

  • टेक्नोलॉजी लाइसेंस: मार्च 2024 में उन्होंने ICAR के Central Plantation Crops Research Institute (CPCRI) से नारियल चिप्स निर्माण की तकनीक का आधिकारिक लाइसेंस लिया।
  • प्रोसेसिंग ट्रेनिंग: संस्थान से नारियल की सही स्लाइसिंग, डिहाइड्रेशन, ड्राइंग तापमान, क्रंच बनाए रखने के तरीके और फूड-ग्रेड पैकेजिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया।
  • उत्पादन और कमर्शियल लॉन्च: जुलाई 2024 में यूनिट स्थापित कर ट्रायल प्रोडक्शन शुरू हुआ और सितंबर 2024 में उत्पाद आधिकारिक रूप से बाजार में पेश कर दिए गए।

Sucess Story: फ्लेवर और प्रीमियम पैकेजिंग ने बनाया साधारण से नारियल चिप्स बिजनेस को खास

जहां लगभग हर घर में नारियल के पेड़ हैं, उस कासरगोड जैसे इलाके में नारियल चिप्स बेचना आसान नहीं था, लेकिन अन्नम्मा के Bless Farm Flave ने नारियल के प्रॉडक्टस में वेल्यू एडिशन करते हुए स्वाद और विविधता पर काम कर बाजार में अपनी एक अलग पहचान बनाई और यही उनकी यूएसपी (USP) भी बना। उन्होंने नमकीन और तीखे स्वाद के शौकीनों के लिए स्पाइसी कोकोनट चिप्स बनाएं, उनकी यह वैरायटी सबसे ज्यादा लोकप्रिय साबित हुई। वहीं उन्होंने युवाओं और बच्चों की पसंद को ध्यान में रखते हुए पाइनएप्पल, स्ट्रॉबेरी, वैनिला और चॉकलेट फ्लेवर में टेंडर कोकोनट (कच्चे नारियल की मलाई) चिप्स लांच किए। उन्होंने प्रॉडक्ट की गुणवत्ता के साथ ही उसकी पैकेजिंग का भी विशेष ध्यान रखा। उन्होंने चिप्स को नमी से बचाने के लिए मार्डन पैकेजिंग के तहत एयरटाइट और फूड-ग्रेड सील्ड पाउच में अपने प्रॉडक्ट को पैक किया, जिससे उत्पाद की शेल्फ लाइफ और बाजार मूल्य दोनों बढ़ गए।

रेलवे स्टेशन के OSOP स्टॉल से Amazon तक बाजार का विस्तार

उत्पाद की बिक्री केवल आसपास की दुकानों तक सीमित न रहे, इसके लिए अन्नम्मा ने सुनियोजित तरीके से मल्टी-चैनल वितरण मॉडल अपनाया। उन्होंने भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ (OSOP) योजना का लाभ उठाते हुए कासरगोड रेलवे स्टेशन पर अपना आधिकारिक स्टॉल शुरू किया, जिसकी बदौलत यह स्थानीय ब्रांड दूर-दराज से आने वाले यात्रियों और पर्यटकों के सीधे संपर्क में आया। रेलवे स्टेशन पर मिली इस पहचान के साथ ही उन्होंने स्थानीय रिटेल काउंटर्स, प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और अपनी आधिकारिक वेबसाइट के जरिए सीधे उपभोक्ताओं (D2C) तक अपनी पहुंच मजबूत की। वहीं उन्होंने अपने ब्रांड को मार्केट प्लेस Amazon पर भी लिस्ट किया। इस तरह अन्नम्मा के टेंडर कोकोनट चिप्स ने स्थानीय बाजार से लेकर ग्लोबल मार्केट तक अपनी पहुंच आसानी से बना ली। ,

PMFME योजना और ग्राम पंचायत अनुदान से मिला वित्तीय संबल

एक आधुनिक फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने के लिए ड्रायर, ऑटोमैटिक स्लाइसर और सीलिंग पैकेजिंग जैसी जरूरी मशीनरी में पूंजी लगाना आवश्यक था। इसके लिए अन्नम्मा ने केंद्र और स्थानीय स्तर की सरकारी वित्तीय योजनाओं का कुशलता से उपयोग किया। उन्हें सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (PMFME) योजना के माध्यम से करीब 3 लाख रुपये का बैंक ऋण और लगभग 1.33 लाख रुपये की पूंजीगत सब्सिडी हासिल हुई। इसके अतिरिक्त, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए मदहुर ग्राम पंचायत की ओर से लगभग 3.45 लाख रुपये का विशेष अनुदान भी मिला। इस आर्थिक सहयोग ने प्रोसेसिंग उपकरणों की गुणवत्ता सुधारने और उत्पादन क्षमता को विस्तार देने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।

कोकोनट वॉटर स्क्वैश और नए प्रीमियम प्रोडक्ट्स से विस्तार की तैयारीSucess Story:

नारियल चिप्स से मिली शुरुआती सफलता के बाद अब ‘Bless Farm Flave‘ का दायरा केवल एक स्नैक तक सीमित नहीं रहने वाला है। अन्नम्मा अब नारियल के हर हिस्से का पूरा इस्तेमाल कर उसके वैल्यू एडिशन पर काम कर रही हैं। वे नारियल फोड़ते समय व्यर्थ बह जाने वाले पानी से पोषक तत्वों से भरपूर कोकोनट वॉटर स्क्वैश और जूस तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ चुकी हैं। साथ ही, स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने वाले ग्राहकों की पसंद को देखते हुए वे बिना चीनी और स्टीविया आधारित हेल्दी प्रोडक्ट्स, कोल्ड-प्रेस्ड वर्जिन कोकोनट ऑयल और स्वादिष्ट कोकोनट आइसक्रीम जैसी प्रीमियम रेंज को बाजार में उतारने की पूरी तैयारी कर रही हैं।

किसान और एग्री-उद्यमियों के लिए 4 जरूरी सीख

अन्नम्मा का यह प्रयोग बताता है कि किसान की आय बढ़ाने के लिए केवल उपज बढ़ाना ही एकमात्र रास्ता नहीं है:

  1. स्थानीय फसल की ताकत पहचानें: जो उपज आपके क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, प्रोसेसिंग का पहला अवसर वहीं छुपा होता है।
  2. वैज्ञानिक संस्थानों से जुड़ें: ICAR, KVK और कृषि विश्वविद्यालयों के पास रेडी-टू-यूज पेटेंट तकनीकें हैं, जिन्हें मामूली लाइसेंस फीस पर लेकर सीधा उद्यम शुरू किया जा सकता है।
  3. वैल्यू चेन में ऊपर बढ़ें: जब तक किसान सिर्फ कच्चा माल बेचेगा, मुनाफा सीमित रहेगा। पैकेजिंग, फ्लेवरिंग और ब्रांडिंग किसान को सीधे उपभोक्ता से जोड़ती है।
  4. उम्र कोई रुकावट नहीं: 62 वर्ष की उम्र में नई तकनीक सीखना और उद्यम खड़ा करना यह साबित करता है कि सही विजन किसी भी उम्र में परिणाम दे सकता है।

माटी की सीख

खेत की फसल बदलना हमेशा जरूरी नहीं होता। कभी-कभी उसी फसल की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और बेचने का सलीका बदल देना किसान की कमाई बदल देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. नारियल चिप्स बिजनेस कैसे शुरू करें?

नारियल की नियमित सप्लाई चेन सुनिश्चित करने के बाद ICAR-CPCRI जैसे संस्थानों से प्रोसेसिंग तकनीक का प्रशिक्षण लें। इसके बाद FSSAI रजिस्ट्रेशन, स्लाइसर-ड्रायर मशीनरी, आकर्षक पैकेजिंग और PMFME योजना के तहत सब्सिडी आवेदन के साथ यूनिट शुरू की जा सकती है।

2. Bless Farm Flave ब्रांड की शुरुआत कब हुई?

टी.एम. अन्नम्मा ने मार्च 2024 में CPCRI से तकनीक का लाइसेंस लिया, जुलाई 2024 में उत्पादन शुरू किया और सितंबर 2024 में उत्पाद बाजार में उतारे।

3. क्या फूड प्रोसेसिंग यूनिट के लिए सरकारी सब्सिडी मिलती है?

हाँ, केंद्र सरकार की PMFME (Pradhan Mantri Formalisation of Micro food processing Enterprises) योजना के तहत प्रोजेक्ट लागत पर 35% (अधिकतम 10 लाख रुपये तक) की क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी मिलती है।

62 साल की महिला उद्यमी T.M. Anamma का पोर्ट्रेट, जिन्होंने नारियल चिप्स बिजनेस के जरिए अपना ब्रांड खड़ा किया

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