ओजस्विनी महोत्सव 2026: 12 राज्यों के 100 से ज्यादा ग्रामीण उद्यमी भोपाल पहुंचे, जानिए क्या है खास

ओजस्विनी महोत्सव 2026 में मध्यप्रदेश सहित देश के 12 राज्यों के 100 से ज्यादा ग्रामीण उद्यमी, महिला स्वयं सहायता समूह, कृषक उत्पादक संगठन और कारीगर अपने उत्पाद लेकर भोपाल पहुंचे हैं। नाबार्ड के सहयोग से आयोजित इस मेले में मिलेट आधारित खाद्य उत्पादों से लेकर हस्तशिल्प और घरेलू उपयोग की वस्तुएं तक उपलब्ध हैं। ग्रामीण उद्यमियों के लिए यह आयोजन अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने और नए बाजार तलाशने का अवसर है। महोत्सव 2 नवंबर तक चलेगा।
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किसान कल्चर, भोपाल: गांवों में तैयार होने वाले उत्पादों को शहरों के ग्राहकों से सीधे जोड़ने के उद्देश्य से भोपाल के बिट्टन मार्केट स्थित दशहरा मैदान में 26 अक्टूबर को ओजस्विनी महोत्सव 2026 की शुरुआत हुई। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने महोत्सव का उद्घाटन किया। इसका आयोजन राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के मध्यप्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय तथा ओजस्विनी समदर्शी न्यास द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।
महोत्सव में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए ग्रामीण उद्यमी, महिला स्वयं सहायता समूह (SHG), कृषक उत्पादक संगठन (FPO) और कारीगर हिस्सा ले रहे हैं। यहां ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार खाद्य उत्पादों, वस्त्रों और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी के साथ बिक्री की व्यवस्था भी की गई है।
ओजस्विनी महोत्सव 2026 में मिलेट से लेकर हस्तशिल्प तक क्या मिलेगा?
महोत्सव में मिलेट आधारित खाद्य उत्पाद, वस्त्र, सजावटी सामान, हस्तशिल्प, घरेलू सजावट की सामग्री, श्रृंगार उत्पाद और ग्रामीण कारीगरों द्वारा तैयार दूसरी वस्तुएं उपलब्ध हैं।
इन उत्पादों की खासियत यह है कि इन्हें स्वयं सहायता समूहों, कृषक उत्पादक संगठनों, गैर-कृषक उत्पादक संगठनों और ग्रामीण उद्यमियों ने तैयार किया है।
आयोजकों के अनुसार इस तरह के मेले ग्रामीण उत्पादकों को बिचौलियों पर निर्भर हुए बिना ग्राहकों से संपर्क स्थापित करने का अवसर देते हैं। इससे उन्हें ग्राहकों की पसंद समझने, अपने उत्पाद प्रस्तुत करने और आगे के कारोबार की संभावनाएं तलाशने में मदद मिल सकती है।
12 राज्यों के 100 से ज्यादा उद्यमियों को मिला बाजार

आयोजकों की जानकारी के अनुसार 26 अक्टूबर से 2 नवंबर 2026 तक चलने वाले इस महोत्सव में मध्यप्रदेश सहित देश के 12 राज्यों के 100 से अधिक ग्रामीण उद्यमी और कारीगर हिस्सा ले रहे हैं।
इस आयोजन में महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाएं समूह बनाकर खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, सिलाई, वस्त्र और घरेलू उत्पाद तैयार करती हैं।
लेकिन उत्पाद तैयार करने के बाद उसके लिए नियमित ग्राहक तलाशना और शहरों के बाजार तक पहुंचना बड़ी चुनौती होती है। ऐसे आयोजनों से महिलाओं को सीधे बिक्री के साथ अपने उत्पादों की पहचान बनाने का भी अवसर मिलता है।
ग्रामीण उत्पादों को बाजार दिलाना जरूरी: राज्यपाल
महोत्सव का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने ग्रामीण कारीगरों और महिला उद्यमियों के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी भारत के गांवों की प्रतिभा, परिश्रम, कला, नवाचार और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। ग्रामीण उत्पादों के पीछे कारीगरों का कौशल, संघर्ष और समर्पण जुड़ा होता है।
राज्यपाल ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में गांवों का समग्र विकास महत्वपूर्ण है। ऐसे आयोजन विभिन्न राज्यों के उद्यमियों को साझा मंच देते हैं, जहां वे अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं और एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकते हैं।
उन्होंने ग्रामीण विकास में नाबार्ड और ओजस्विनी समदर्शी न्यास के योगदान की भी सराहना की।
नाबार्ड महिला उद्यमियों और FPO को कैसे दे रहा सहयोग?
नाबार्ड की मध्यप्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय की मुख्य महाप्रबंधक सी. सरस्वती ने बताया कि बैंक कृषि और ग्रामीण विकास के साथ ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने, आजीविका के अवसर बढ़ाने और ग्रामीण उद्यमों को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
नाबार्ड ग्रामीण उद्यमियों को वित्तीय सहायता के साथ प्रशिक्षण और विपणन संबंधी सहयोग भी उपलब्ध कराता है।
सरस्वती के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक मजबूती के बिना आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल है। इसके लिए गांवों में रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाना जरूरी है।
किसान और ग्रामीण उद्यमियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह महोत्सव?
ग्रामीण अर्थव्यवस्था केवल खेतों में फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है। कृषि उपज से खाद्य उत्पाद तैयार करना, मिलेट का प्रसंस्करण, ग्रामीण हस्तशिल्प और छोटे उद्यम भी गांवों में रोजगार और आय के महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं।
ऐसे में ओजस्विनी महोत्सव 2026 किसानों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए अपने उत्पादों की बिक्री और बाजार की मांग को समझने का मंच बन सकता है।
विशेषकर FPO और स्वयं सहायता समूहों के लिए ग्राहकों से सीधे संपर्क स्थापित करना उपयोगी हो सकता है। हालांकि ऐसे आयोजनों का स्थायी आर्थिक लाभ तभी स्पष्ट होगा, जब मेले के बाद भी उद्यमियों को नियमित ऑर्डर और बाजार उपलब्ध हो सकें।
भोपाल में ओजस्विनी महोत्सव कब तक चलेगा?
स्थान: दशहरा मैदान, बिट्टन मार्केट, भोपाल
तारीख: 26 अक्टूबर से 2 नवंबर 2026
आयोजक: नाबार्ड, मध्यप्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय और ओजस्विनी समदर्शी न्यास
मुख्य आकर्षण: मिलेट आधारित खाद्य उत्पाद, हस्तशिल्प, ग्रामीण वस्त्र, घरेलू सजावट की सामग्री और महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद।
राज्यपाल और अन्य अतिथियों ने भोपाल के नागरिकों से महोत्सव में पहुंचकर ग्रामीण उद्यमियों के उत्पाद खरीदने का आग्रह किया। उनका कहना था कि इन उत्पादों की खरीद ग्रामीण कारीगरों और महिला उद्यमियों की आजीविका को मजबूत बनाने में योगदान दे सकती है।
ओजस्विनी महोत्सव 2026 का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि गांवों में तैयार उत्पादों को शहरों का बाजार मिल रहा है। अब जरूरत ऐसे अवसरों को सालभर चलने वाले कारोबार में बदलने की है।



