करनाल में फसल अवशेष प्रबंधन पर सख्ती: पराली जलाने पर ₹30,000 तक जुर्माना और एफआईआर

फसल अवशेष प्रबंधन के तहत करनाल में धान कटाई के बीच पराली जलाने पर रोक और निगरानी जारी है।
उपलब्ध पृष्ठभूमि विवरण में 2 एकड़ तक ₹5,000 से लेकर 5 एकड़ से अधिक पर ₹30,000 तक जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।
आग लगाने पर एफआईआर, रेड एंट्री और दो साल तक ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकरण से रोक का उल्लेख है।
जिले में करीब 400 बेलर सेट और 550,000 मीट्रिक टन पराली गांठों के प्रबंधन की योजना बताई गई है।
किसान कल्चर, करनाल: करनाल में धान की कटाई का काम करीब 40 प्रतिशत पूरा होने के दौरान फसल अवशेष जलाने पर प्रशासनिक सख्ती का प्रावधान बताया गया है। हरियाणा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिले में फसल अवशेषों में आग लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध है और जिलाधीश ने धारा 163 लागू की है। यह विवरण 12 अक्तूबर के करनाल dateline वाले पृष्ठभूमि-आधारित आधिकारिक विवरण पर आधारित है, इसे नई घोषणा के तौर पर नहीं पढ़ा जाना चाहिए।
उप कृषि निदेशक डॉ. जसविंद्र सिंह के मुताबिक, पराली जलाने पर भूमि क्षेत्र के आधार पर जुर्माने का प्रावधान है। 2 एकड़ तक की भूमि पर ₹5,000, 5 एकड़ तक ₹10,000 और 5 एकड़ से अधिक भूमि पर ₹30,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
डॉ. जसविंद्र सिंह ने किसानों से कहा, “फसल अवशेषों में आग न लगाएं, बल्कि उनका उचित प्रबंधन करें।” विज्ञप्ति के अनुसार, नियम तोड़ने पर भारतीय न्याय संहिता 2023 और वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम-1981 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
फसल अवशेष प्रबंधन में किसानों पर क्या कार्रवाई हो सकती है
विवरण के मुताबिक, खेत में फसल अवशेष जलाते हुए पाए जाने पर ₹30,000 तक का जुर्माना, एफआईआर और रेड एंट्री का प्रावधान है। इसके अलावा संबंधित किसान को दो वर्ष तक ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर अपनी फसल का पंजीकरण नहीं करवाने दिया जाएगा।
पोर्टल पर पंजीकरण नहीं होने से अगले दो वर्ष तक फसल मंडी में बेचने पर असर पड़ने की बात विज्ञप्ति में कही गई है। यह प्रावधान फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर निगरानी और कार्रवाई के संदर्भ में बताया गया है।
निगरानी और पराली प्रबंधन की व्यवस्था
आगजनी की घटनाओं की निगरानी के लिए सेटेलाइट और कई स्थानों पर ड्रोन से 24 घंटे लगातार निगरानी किए जाने की जानकारी दी गई है। किसानों को अवशेष प्रबंधन के लिए जागरूक करने के लिए गांवों में शिविर, लाउडस्पीकर प्रचार, स्कूली बच्चों की रैलियां और व्हाट्सऐप समूहों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
जिले में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए करीब 400 बेलर सेट उपलब्ध होने की बात कही गई है। एक्स-सीटू व्यवस्था के तहत 550,000 मीट्रिक टन पराली की गांठों के प्रबंधन का लक्ष्य बताया गया है।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रशासनिक प्रयासों और किसानों के सहयोग से पिछले वर्षों की तुलना में आगजनी की घटनाओं में करीब 76 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। खरीफ 2025 में गांव गगसीना को जिले का एकमात्र येलो जोन बताया गया है। इस वर्ष जीरो बर्निंग का लक्ष्य पाने के लिए करीब 800 अधिकारियों और कर्मचारियों वाली ग्राम स्तरीय समितियां और प्रवर्तन दल गठित किए गए हैं।



