मौसम आधारित कृषि परामर्श: यूपी में नमी बचाने, यूरिया रोकने और पशु टीकाकरण की सलाह

किसान कल्चर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में किसानों और पशुपालकों के लिए मौसम आधारित कृषि परामर्श जारी किया गया है। सलाह में खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखने, फसलों में अनावश्यक यूरिया नहीं डालने, धान की बीमारियों और कीटों से बचाव के उपाय अपनाने तथा पशुओं के लिए टीकाकरण और मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा लेने की बात कही गई है।

उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 01 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद में क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की वर्ष 2026-27 की नौवीं बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता महानिदेशक डॉ. संजय सिंह ने की। इसमें मौजूदा मौसम को देखते हुए किसानों के लिए फसल प्रबंधन से जुड़े सुझाव जारी किए गए।
मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक प्रदेश के ज्यादातर कृषि जलवायु क्षेत्रों में सप्ताह के शुरुआती दौर में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने की संभावना है। अंतिम चरण में छिटपुट बारिश हो सकती है और औसत साप्ताहिक बारिश सामान्य से काफी कम रहने की संभावना बताई गई है। पश्चिमी मैदानी, दक्षिणी-पश्चिमी अर्धशुष्क मैदानी और विंध्य क्षेत्र के कुछ हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से आंशिक रूप से अधिक रह सकता है।
मौसम आधारित कृषि परामर्श में नमी और यूरिया पर जोर
परिषद ने किसानों को खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखने और फसलों में अनावश्यक यूरिया का इस्तेमाल पूरी तरह नहीं करने की सलाह दी है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि इससे फसलों में रोग और कीटों के प्रकोप को रोकने में मदद मिल सकती है। अधिक उत्पादन के लिए किसानों को केंद्र या राज्य सरकार की ओर से स्थापित हाईटेक नर्सरी के पौधों का ही इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है।
धान की फसल में फॉल्स स्मट यानी मिथ्या कंडुआ रोग से बचाव के लिए बाली निकलते समय प्रोपिकोनाजोल या कार्बेन्डाजिम के घोल का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। गंधी कीट की रोकथाम के लिए इमिडाक्लोप्रिड या एजाडिरैक्टिन के छिड़काव का सुझाव दिया गया है।
सरसों, गन्ने और आलू की बुवाई पर सलाह
मौसम और खेत में उपलब्ध नमी को देखते हुए किसानों को सरसों और राई की उन्नतशील व शोधित किस्मों की बुवाई करने को कहा गया है। इनमें पूसा सरसों-32, पूसा सरसों-34, पूसा डबल जीरो, सुरेखा, गिरिराज, वरुणा और नरेंद्र सरसों शामिल हैं।
विज्ञप्ति में गन्ने की शीघ्र और मध्यम पकने वाली उच्च शर्करायुक्त प्रजातियों की समय से बुवाई सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है। आलू की अगेती किस्मों कुफरी बहार, कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी ज्योति और कुफरी सूर्या की समय पर बुवाई करने को भी कहा गया है।
मछली और पशुपालन के लिए सेवाएं
मछली पालकों को बताया गया है कि कतला, रोहू, नैन और ग्रास कार्प जैसी प्रजातियों का मत्स्य बीज उत्तर प्रदेश मत्स्य विकास निगम की हैचरियों में उपलब्ध है। उपयुक्त समय पर इसका संचय किया जा सकता है।
पशुपालन और पशु स्वास्थ्य प्रबंधन के तहत प्रत्येक जिले के राजकीय पशु चिकित्सालयों के माध्यम से खुरपका-मुंहपका बीमारी और गोवंशीय पशुओं में एलएसडी यानी लंपी स्किन डिजीज के खिलाफ नि:शुल्क टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। किसानों और पशुपालकों के घर तक चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के लिए मोबाइल वेटरनरी यूनिट की सेवा के लिए टोल फ्री नंबर 1962 जारी किया गया है। पशु समस्या के लिए 18001805141 पर संपर्क किया जा सकता है।
प्राकृतिक या आकस्मिक आपदा की स्थिति में राज्य स्तरीय आपदा कंट्रोल रूम के नंबर 1070 और जिला स्तरीय नंबर 1077 पर संपर्क किया जा सकता है।