किसानों के लिए अच्छी खबर : सरकार ने बढ़ाया रबी फसलों का MSP, गेहूं ₹2,610, सरसों ₹6,613 प्रति क्विंटल, देखें सभी नए दाम

रबी की बुवाई से पहले किसानों के लिए सरकारी समर्थन मूल्य की नई दरें तय हो गई हैं। विपणन सत्र 2027-28 में MSP पर उपज बेचने वाले किसानों को गेहूं में ₹25, सरसों में ₹413 और मसूर में ₹390 प्रति क्विंटल अधिक मिलेंगे। केंद्र ने छह रबी फसलों का MSP बढ़ाया है। सबसे बड़ा इजाफा कुसुम में ₹675 प्रति क्विंटल का हुआ है, जबकि गेहूं का नया समर्थन मूल्य ₹2,610 और सरसों का ₹6,613 प्रति क्विंटल होगा।
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किसान कल्चर, नई दिल्ली: रबी की बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों के लिए अगले विपणन सत्र के सरकारी समर्थन मूल्य तय हो गए हैं। केंद्र सरकार ने गेहूं समेत छह रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP बढ़ाया है। गेहूं का नया MSP ₹2,610 और सरसों-रेपसीड का ₹6,613 प्रति क्विंटल होगा। सबसे बड़ी बढ़ोतरी कुसुम में ₹675 प्रति क्विंटल की हुई है, जबकि गेहूं के समर्थन मूल्य में ₹25 का इजाफा किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने बुधवार, 30 सितंबर को रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए इन दरों को मंजूरी दी। फैसले में गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों-रेपसीड और कुसुम शामिल हैं। सरकार का कहना है कि बढ़े हुए समर्थन मूल्य से किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम देने और फसलों में विविधता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इस फैसले में किसानों के लिए ध्यान देने वाली बात यह है कि सभी फसलों के MSP में बढ़ोतरी एक जैसी नहीं है। गेहूं में प्रति क्विंटल ₹25 और चने में ₹83 की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, मसूर में ₹390, सरसों-रेपसीड में ₹413 और कुसुम में ₹675 का इजाफा किया गया है।
रबी फसलों का MSP 2027-28: किस फसल का कितना बढ़ा दाम?
नए समर्थन मूल्य की तुलना पिछले रबी विपणन सत्र 2026-27 से की गई है। नीचे दी गई सभी दरें रुपये प्रति क्विंटल में हैं।
| फसल | पिछला MSP: 2026-27 | नया MSP: 2027-28 | बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|
| गेहूं | ₹2,585 | ₹2,610 | ₹25 |
| जौ | ₹2,150 | ₹2,286 | ₹136 |
| चना | ₹5,875 | ₹5,958 | ₹83 |
| मसूर | ₹7,000 | ₹7,390 | ₹390 |
| सरसों-रेपसीड | ₹6,200 | ₹6,613 | ₹413 |
| कुसुम | ₹6,540 | ₹7,215 | ₹675 |
इस तरह छह फसलों में सबसे अधिक MSP मसूर का ₹7,390 प्रति क्विंटल होगा। कुसुम का समर्थन मूल्य ₹7,215 और सरसों-रेपसीड का ₹6,613 प्रति क्विंटल तय किया गया है। चने का नया MSP ₹5,958 और जौ का ₹2,286 प्रति क्विंटल होगा।
गेहूं किसानों के लिए ₹25 की बढ़ोतरी का क्या मतलब है?
गेहूं का समर्थन मूल्य ₹2,585 से बढ़कर ₹2,610 प्रति क्विंटल हुआ है। पिछले समर्थन मूल्य के मुकाबले यह करीब एक फीसदी की बढ़ोतरी है। इससे MSP पर बेची जाने वाली उपज के लिए प्रति क्विंटल ₹25 अधिक मिलेंगे।
इसे एक उदाहरण से समझें। कोई किसान यदि सरकारी खरीद व्यवस्था के तहत MSP पर 100 क्विंटल गेहूं बेचता है, तो पिछले समर्थन मूल्य के मुकाबले उसकी बिक्री राशि ₹2,500 अधिक होगी। यह बढ़े हुए समर्थन मूल्य से मिलने वाली अतिरिक्त बिक्री राशि है। किसान का वास्तविक मुनाफा निकालने के लिए खेती में हुए खर्च भी देखने होंगे।
इसी मात्रा की सरसों MSP पर बेचने पर बढ़ोतरी के कारण बिक्री राशि में ₹41,300 का अंतर होगा। यह उदाहरण बताता है कि समर्थन मूल्य में फसल के हिसाब से अलग-अलग बढ़ोतरी किसानों की बिक्री राशि पर भी अलग असर डालेगी।

सरसों और कुसुम में ज्यादा बढ़ोतरी, दलहन पर भी जोर
सरसों-रेपसीड का MSP ₹413 बढ़ाकर ₹6,613 प्रति क्विंटल किया गया है। कुसुम में सबसे अधिक ₹675 की बढ़ोतरी हुई है और इसका नया समर्थन मूल्य ₹7,215 प्रति क्विंटल होगा। मसूर का MSP ₹390 बढ़कर ₹7,390 प्रति क्विंटल हो गया है।
सरकार के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों से अनाज के साथ दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है। इन फसलों के लिए बेहतर समर्थन मूल्य तय करना इसी प्रयास का हिस्सा है।
हालांकि, किसान के लिए फसल चुनने में MSP के साथ स्थानीय परिस्थितियां भी मायने रखती हैं। खेत की मिट्टी, सिंचाई की उपलब्धता, खेती का खर्च, संभावित पैदावार और आसपास खरीद की व्यवस्था को साथ देखकर ही बढ़े हुए समर्थन मूल्य का व्यावहारिक फायदा समझा जा सकता है।
लागत से डेढ़ गुना MSP का नियम क्या है?
सरकार ने कहा है कि रबी फसलों का MSP बढ़ाने का फैसला केंद्रीय बजट 2018-19 में घोषित नीति के मुताबिक लिया गया है। इस नीति में MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुना स्तर पर रखने की बात कही गई थी।
आसान शब्दों में, इस गणना में खेती की औसत लागत से कम से कम 50 फीसदी ऊपर समर्थन मूल्य तय करने का आधार लिया जाता है। हालांकि, सरकारी गणना की औसत लागत और किसी किसान के खेत में हुए वास्तविक खर्च में अंतर हो सकता है।
सरकार के अनुमान के मुताबिक, नए MSP पर उत्पादन लागत के ऊपर सबसे अधिक मार्जिन गेहूं में 106 फीसदी है। इसके बाद सरसों-रेपसीड में 96 फीसदी, मसूर में 92 फीसदी, चने में 59 फीसदी, जौ में 58 फीसदी और कुसुम में 50 फीसदी मार्जिन का अनुमान है।
ये प्रतिशत औसत लागत के आधार पर निकाले गए हैं। इन्हें हर किसान के लिए तय मुनाफा नहीं माना जा सकता। वास्तविक कमाई उसकी पैदावार, खेती में हुए खर्च और उपज के बिक्री मूल्य पर निर्भर करेगी।
गेहूं और छह रबी फसलों की सरकारी खरीद कितनी हुई?
सरकार ने MSP बढ़ाने की घोषणा के साथ पिछले वर्षों की खरीद और किसानों को किए गए भुगतान के आंकड़े भी रखे हैं। इनके मुताबिक, 2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं की सरकारी खरीद 3,715 लाख मीट्रिक टन रही। इससे पहले 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह खरीद 2,254 लाख मीट्रिक टन थी।
गेहूं समेत छह प्रमुख रबी फसलों की कुल खरीद भी इन अवधियों में बढ़ी है। सरकार के अनुसार, पहले की अवधि में 2,302 लाख मीट्रिक टन खरीद हुई थी, जबकि बाद की अवधि में यह 3,921 लाख मीट्रिक टन रही।
| सरकारी आंकड़ा | 2004-05 से 2013-14 | 2014-15 से 2025-26 |
|---|---|---|
| गेहूं की खरीद | 2,254 लाख मीट्रिक टन | 3,715 लाख मीट्रिक टन |
| छह रबी फसलों की कुल खरीद | 2,302 लाख मीट्रिक टन | 3,921 लाख मीट्रिक टन |
| गेहूं किसानों को MSP भुगतान | ₹2.56 लाख करोड़ | ₹7.31 लाख करोड़ |
| छह रबी फसलों के किसानों को MSP भुगतान | ₹2.65 लाख करोड़ | ₹8.36 लाख करोड़ |
इन कुल आंकड़ों को पढ़ते समय अवधि का अंतर भी ध्यान रखना जरूरी है। पहली अवधि में 10 साल और दूसरी में 12 साल शामिल हैं। इसलिए सालाना खरीद या भुगतान की तुलना करने के लिए अलग गणना की जरूरत होगी।
किसानों को MSP के तहत कितना भुगतान मिला?
सरकार के मुताबिक, 2014-15 से 2025-26 के बीच गेहूं किसानों को MSP के तहत ₹7.31 लाख करोड़ का भुगतान किया गया। 2004-05 से 2013-14 की अवधि में यह राशि ₹2.56 लाख करोड़ थी।
छह प्रमुख रबी फसलों को मिलाकर किसानों को किया गया भुगतान पहली अवधि के ₹2.65 लाख करोड़ से बढ़कर दूसरी अवधि में ₹8.36 लाख करोड़ रहा। ये पिछले वर्षों की खरीद के कुल भुगतान के आंकड़े हैं।
नया MSP किस सीजन के लिए है?
यह फैसला रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए लिया गया है। किसान नई दरों को इसी सत्र के समर्थन मूल्य के रूप में देखें। MSP की घोषणा को आज के स्थानीय मंडी भाव के साथ मिलाकर नहीं पढ़ना चाहिए।
सरकारी खरीद में उपज बेचने के लिए अपने राज्य की खरीद संबंधी सूचना, पंजीयन, खरीद केंद्र, समय सीमा और गुणवत्ता की शर्तों की जानकारी लेना जरूरी होगा। नए समर्थन मूल्य से मिलने वाला फायदा इस बात पर भी निर्भर करेगा कि किसान अपनी उपज किस व्यवस्था के तहत और किस दाम पर बेचता है।
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