कृषि में CSR सहयोग: ₹9.03 करोड़ से 7 ICAR तकनीकों को मिलेगा बढ़ावा, 3 कंपनियों से साझेदारी

कृषि में CSR सहयोग के जरिए ICAR अब फसल, बागवानी, मत्स्य पालन, पशु स्वास्थ्य, जैव कीटनाशक, जैव उर्वरक और बायोएथेनॉल से जुड़ी 7 तकनीकों को खेत और बाजार तक पहुंचाने पर ₹9.03 करोड़ लगाएगा। इसी कड़ी में Pidilite Industries, Venkateshwara Hatcheries और Everest Instruments ने ICAR के साथ खेती, ग्रामीण उद्यमिता और नई कृषि तकनीकों को आगे बढ़ाने के लिए MoU किए हैं।
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किसान कल्चर, नई दिल्ली: खेती की कई नई तकनीकें रिसर्च संस्थानों में तैयार हो जाती हैं, लेकिन किसान तक पहुंचने में उन्हें लंबा समय लग जाता है। ICAR अब इसी दूरी को कम करने की कोशिश कर रहा है। 24 सितंबर को नई दिल्ली में Agrinnovate India की 15वीं AGM और 71वीं बोर्ड बैठक में नई कृषि तकनीकों को बड़े स्तर पर आजमाने, आगे बढ़ाने और बाजार से जोड़ने पर फैसला हुआ।
इस पहल के दो अहम हिस्से हैं। पहला, ICAR की सात तकनीकों को आगे बढ़ाने के लिए ₹9.03 करोड़ लगाए जाएंगे। दूसरा, खेती और ग्रामीण क्षेत्रों में CSR पैसा लगाने के लिए तीन बड़ी कंपनियों को ICAR के साथ जोड़ा गया है।
₹9.03 करोड़ आखिर कहां खर्च होंगे?
यह पैसा सीधे किसानों के खाते में नहीं जाएगा। कृषि में CSR सहयोग के तहत 7 ICAR तकनीकों के लिए ₹9.03 करोड़ की प्रतिबद्धता और 3 कंपनियों के साथ साझेदारी की गई है। इसका इस्तेमाल ICAR की चुनी गई तकनीकों को बेहतर बनाने, बड़े स्तर पर जांचने और इस्तेमाल के लिए तैयार करने में होगा।
इन सात तकनीकों का संबंध फसल विज्ञान, बागवानी, मत्स्य पालन, पशु स्वास्थ्य, जैव कीटनाशक, जैव उर्वरक और बायोएथेनॉल जैसे क्षेत्रों से है।
आसान भाषा में समझें तो रिसर्च सेंटर में कोई तकनीक सफल होने के बाद भी उसे किसान तक पहुंचाने से पहले कई चरणों से गुजरना पड़ता है। उसे बड़े स्तर पर जांचना होता है, उत्पादन का तरीका तैयार करना होता है और यह देखना होता है कि उसे बाजार में किस तरह उपलब्ध कराया जा सकता है। ₹9.03 करोड़ इसी रास्ते को आसान बनाने में लगाए जाएंगे।
कृषि में CSR सहयोग: 3 कंपनियों ने ICAR के साथ क्यों किया MoU?
बैठक में Pidilite Industries, Venkateshwara Hatcheries और Everest Instruments ने ICAR के साथ MoU किए।
कृषि में CSR सहयोग लेने के लिए 7 ICAR तकनीकों के लिए ₹9.03 करोड़ की प्रतिबद्धता और 3 कंपनियों के साथ साझेदारी की गई है।इन समझौतों के जरिए कंपनियां अपने CSR पैसे और दूसरे संसाधनों को खेती से जुड़े कामों में लगा सकेंगी। इसमें नई कृषि तकनीक को आगे बढ़ाना, ग्रामीण उद्यमिता, महिला और युवाओं को खेती से जुड़े कारोबार से जोड़ना, कृषि स्टार्टअप और मशीनीकरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
इसके अलावा जलवायु के हिसाब से खेती को तैयार करने, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि उत्पादों की वैल्यू चेन मजबूत करने जैसे काम भी इसके दायरे में रखे गए हैं।
महिला, युवा और कृषि स्टार्टअप भी फोकस में
कृषि में CSR सहयोग लेने लिए ICAR तकनीकों के लिए ₹9.03 करोड़ की प्रतिबद्धता और 3 कंपनियों के साथ साझेदारी की गई है।इस साझेदारी का दायरा सिर्फ नई तकनीक को बाजार तक पहुंचाने तक सीमित नहीं है। महिलाओं, युवाओं, कृषि स्टार्टअप और ग्रामीण उद्यमियों को भी इससे जोड़ने की तैयारी है।
फोकस ऐसे कामों पर रहेगा जिनसे गांवों में नए रोजगार और छोटे कारोबार के मौके बन सकें। इसके लिए प्रशिक्षण, तकनीकी मदद, डिजिटल समाधान और क्षमता बढ़ाने वाले कार्यक्रम चलाए जा सकते हैं।
इसके दायरे में पोषण से जुड़ी खेती, जैव संवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि उत्पादों की वैल्यू चेन और कृषि मशीनीकरण भी शामिल हैं।
शिक्षा, ज्ञान साझा करने और ‘वन हेल्थ’ से जुड़े काम भी इस सहयोग का हिस्सा होंगे। यानी कोशिश सिर्फ फसल उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि खेती से जुड़े पूरे ग्रामीण इकोसिस्टम को मजबूत करने की है।
CSR का खेती से क्या लेना-देना है?
कृषि में CSR सहयोग के अंर्तगत 7 ICAR तकनीकों के लिए ₹9.03 करोड़ की प्रतिबद्धता और 3 कंपनियों के साथ साझेदारी की गई है।CSR यानी Corporate Social Responsibility। बड़ी कंपनियां अपने मुनाफे का एक हिस्सा सामाजिक कामों पर खर्च करती हैं। अब कोशिश यह है कि इस पैसे का कुछ हिस्सा खेती और ग्रामीण इलाकों की ऐसी परियोजनाओं में लगाया जाए, जिनका फायदा लंबे समय तक मिल सके। मसलन, किसी नई कृषि तकनीक को गांवों में आजमाना हो, महिलाओं को कृषि से जुड़ा कारोबार शुरू कराना हो, किसी कृषि स्टार्टअप को तकनीकी मदद देनी हो या किसानों को नई मशीनों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग देनी हो, तो ऐसे काम CSR के जरिए आगे बढ़ाए जा सकते हैं।
किसान को इससे क्या फायदा हो सकता है?
किसान के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि इस पूरी कवायद से खेत में क्या बदलेगा।
अगर ICAR की कोई नई तकनीक फसल की लागत कम करती है, बीमारी से बचाती है, उत्पादन बढ़ाती है या किसान को बेहतर बाजार दिलाती है, तो उसे तेजी से खेत तक पहुंचाया जा सकेगा।
इसी तरह कृषि मशीन, जैव उर्वरक, जैव कीटनाशक या पशु स्वास्थ्य से जुड़ी सफल तकनीक को किसी कंपनी के साथ मिलकर बड़े स्तर पर तैयार किया जाता है तो किसान के लिए उसकी उपलब्धता बढ़ सकती है।
हालांकि इसका असर तुरंत नहीं दिखेगा। असली परीक्षा यह होगी कि ₹9.03 करोड़ से आगे बढ़ाई जाने वाली सात तकनीकों में से कितनी किसानों के रोजमर्रा के काम तक पहुंच पाती हैं।
Agrinnovate India इस पूरी प्रक्रिया में क्या करेगा?
Agrinnovate India, ICAR से जुड़ी कंपनी है। इसका मुख्य काम ICAR के वैज्ञानिकों और संस्थानों में तैयार तकनीकों को उद्योग, स्टार्टअप और बाजार से जोड़ना है।
मान लीजिए किसी ICAR संस्थान ने किसानों के लिए उपयोगी तकनीक तैयार की। Agrinnovate India उस तकनीक के लिए ऐसी कंपनी या कारोबारी साझेदार तलाश सकता है, जो उसे बड़े स्तर पर तैयार कर सके और बाजार तक पहुंचा सके।
अब CSR को भी इसी मॉडल से जोड़ा जा रहा है, ताकि कंपनियों का पैसा गांव और खेती से जुड़ी जरूरतों तक पहुंच सके।
लैब में बनी तकनीक खेत तक पहुंचे, यही असली चुनौती
भारत में कृषि अनुसंधान का बड़ा नेटवर्क है। हर साल फसल, बीज, मशीन, पशुपालन, मत्स्य पालन और दूसरी कृषि गतिविधियों से जुड़ी नई तकनीकें सामने आती हैं।
मुश्किल तब आती है जब अच्छी तकनीक किसान तक पहुंचने से पहले ही छोटे स्तर पर अटक जाती है।
ICAR और उद्योग जगत की नई साझेदारी इसी समस्या पर काम करने की कोशिश है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि 7 तकनीकों पर खर्च होने वाले ₹9.03 करोड़ और तीन कंपनियों के CSR सहयोग से खेत में कितना बदलाव दिखाई देता है।

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