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Sucess Story : कस्टम हायरिंग सेंटर, मशीनें किराये पर देकर सालाना ₹4.50 लाख तक मुनाफा, जबलपुर के विपिन ने खेती के साथ बढ़ाई कमाई

अक्टूबर 1, 2026
Report by: प्राजंली पातुरकरKisan Culture
जबलपुर के भदम गांव में कृषि मशीनों के साथ किसान विपिन तिवारी

कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने के लिए सरकार अनुदान भी देती है, जबलपुर के भदम गांव में कंप्यूटर साइंस स्नातक 36 वर्षीय युवा किसान विपिन तिवारी ने सरकारी अनुदान की मदद से ‘कस्टम हायरिंग सेंटर‘ स्थापित कर खेती को मुनाफे के आधुनिक कारोबार में बदल दिया है; वे 8 एकड़ पैतृक जमीन पर उन्नत खेती करने के साथ-साथ आसपास के छोटे किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र किराये पर देकर सालाना 4 से 4.50 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।

किसान कल्चर, जबलपुर: महंगी कृषि मशीनें खरीदे बिना आसपास के किसान समय पर बुवाई और खेत की तैयारी कर पा रहे हैं। उन्हें किराये पर मशीनें उपलब्ध कराने वाले युवा किसान विपिन तिवारी को भी इससे सालाना 4 से 4.50 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हो रहा है। जबलपुर जिले के भदम गांव में विपिन ने करीब 25 लाख रुपये की लागत से कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू किया है। इसके लिए उन्हें कृषि अभियांत्रिकी विभाग से 7.92 लाख रुपये का अनुदान मिला।

सिहोरा विकासखंड के 36 वर्षीय विपिन ने वर्ष 2024-25 में कस्टम हायरिंग सेंटर योजना का लाभ लेकर कृषि यंत्र खरीदे थे। अब उनके सेंटर से भदम के अलावा खजरी, घुटना और पौड़ी सहित आसपास के गांवों के किसानों को मशीनें किराये पर मिल रही हैं। अपनी आठ एकड़ पैतृक जमीन पर खेती करने वाले विपिन के लिए यह सेंटर कमाई का एक अतिरिक्त जरिया बना है।

कस्टम हायरिंग सेंटर का फायदा, मशीन खरीदने के खर्च से बच जाते हैं छोटे किसान

खेत समतल करने से लेकर बुवाई और फसल अवशेषों के प्रबंधन तक कई कामों में अलग-अलग मशीनों की जरूरत पड़ती है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए इन सभी यंत्रों को खरीदना मुश्किल होता है। विपिन के कस्टम हायरिंग सेंटर से उन्हें जरूरत के समय किराये पर मशीन लेने का विकल्प मिल रहा है।

सेंटर में ट्रैक्टर, सुपर सीड ड्रिल, स्ट्रॉ रीपर, पावर स्प्रे पंप, कल्टीवेटर, रोटावेटर और लेजर लैंड लेवलर उपलब्ध हैं। इनकी मदद से आसपास के किसान खेत की तैयारी और बुवाई जैसे काम समय पर कर पा रहे हैं।

क्या है सरकार की कस्टम हायरिंग योजना

मध्यप्रदेश में कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित ‘कस्टम हायरिंग सेंटर योजना’ के तहत ग्रामीण युवाओं को कृषि यंत्रों का किराया केंद्र शुरू करने के लिए परियोजना लागत पर 40 प्रतिशत (अधिकतम 10 लाख रुपये तक) का अनुदान दिया जाता है; 18 से 40 वर्ष की आयु वाले 12वीं पास युवा, जिनके या उनके माता-पिता के नाम पर कृषि भूमि हो, वे आधार, खसरा व बैंक पासबुक जैसे जरूरी दस्तावेजों के साथ विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जहां चयन कंप्यूटरीकृत लॉटरी के जरिए होता है।

मध्य प्रदेश कस्टम हायरिंग सेंटर योजना पात्रता सब्सिडी और यंत्र किराया बिजनेस मॉडल इन्फोग्राफिक चार्ट
कस्टम हायरिंग सेंटर योजना की मुख्य शर्तें, 40% तक सरकारी अनुदान और कृषि यंत्र किराये पर देने का पूरा मॉडल।

नरवाई जलाए बिना बुवाई, अवशेषों से बन रहा भूसा

कस्टम हायरिंग सेंटर की मशीनें फसल अवशेषों के इस्तेमाल में भी मदद कर रही हैं। सुपर सीड ड्रिल से किसान नरवाई जलाए बिना सीधे बुवाई कर पा रहे हैं। इससे अगली फसल की तैयारी के लिए अवशेषों को आग लगाने की जरूरत कम होती है।

स्ट्रॉ रीपर की मदद से फसल अवशेषों को भूसे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तरह खेत में बचे अवशेष उपयोग में आ रहे हैं और किसानों को उनके प्रबंधन का विकल्प मिल रहा है।

₹10–11 लाख कारोबार, खर्च के बाद ₹4–4.50 लाख बचत

विपिन के कस्टम हायरिंग सेंटर का सालाना कारोबार करीब 10 से 11 लाख रुपये है। संचालन का खर्च निकालने के बाद इससे लगभग 4 से 4.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिलता है।

उनकी खेती से होने वाली आय इससे अलग है। आठ एकड़ कृषि भूमि से वे सालाना करीब 10 से 11 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। हालांकि, खेती की इस राशि में से लागत घटाने के बाद की शुद्ध बचत का अलग विवरण उपलब्ध नहीं है।

कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई के बाद खेती में बढ़ाया मशीनों का इस्तेमाल

कंप्यूटर साइंस में बीएससी कर चुके विपिन ने अपनी पैतृक जमीन को मॉडल फार्म के रूप में विकसित किया है। खेती के साथ मशीनें किराये पर देने का काम जोड़ने से उनकी आमदनी के दो रास्ते बने हैं।

भदम और आसपास के गांवों के किसानों को भी इसका फायदा मिल रहा है। उन्हें हर काम के लिए अपनी मशीन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती और विपिन को मशीनों के किराये से आय होती है।

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