झज्जर में पराली प्रबंधन: खेत में मिलाने पर 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन

किसान कल्चर, झज्जर, हरियाणा: झज्जर में पराली प्रबंधन को लेकर जिला प्रशासन ने किसानों को फसल अवशेष खेत में मिलाने की तकनीक अपनाने के लिए जागरूक करने पर जोर दिया है। 03 अक्टूबर 2026 की विभागीय जानकारी के मुताबिक, पराली खेत में मिलाने पर 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसकी मौजूदा स्थिति की पुष्टि जरूरी है।
हरियाणा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, झज्जर जिला प्रशासन ने फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए किसानों को वैज्ञानिक और वैकल्पिक पराली प्रबंधन तकनीकों की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। यह जानकारी 03 अक्टूबर 2026 को जारी जिला-स्तरीय प्रेस विज्ञप्ति में दी गई थी।
प्रशासन के मुताबिक, कृषि विभाग की ओर से पराली को खेत में मिलाने पर किसानों को प्रति एकड़ 1200 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। साथ ही, किसानों तक फसल अवशेष प्रबंधन की उपलब्ध मशीनरी और वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी पहुंचाने को कहा गया है। इस प्रोत्साहन की वर्तमान उपलब्धता और लागू शर्तों की पुष्टि संबंधित विभाग से करना जरूरी है।
डीसी वर्षा खांगवाल ने कहा कि फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होती है। उन्होंने अधिकारियों को किसानों के साथ लगातार संवाद रखने और पराली न जलाने के लिए उपलब्ध तकनीकों व सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के निर्देश दिए।
पराली प्रबंधन पर खेत स्तर की निगरानी
जिला प्रशासन ने पराली जलाने की आशंका वाले क्षेत्रों में नियमित फील्ड विजिट और पहले से कदम उठाने को कहा है। संभावित घटनाओं की तत्काल सूचना और कार्रवाई के लिए क्विक रेस्पॉन्स टीमों को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत के अनुसार ड्रोन से भी निगरानी की जाएगी।
प्रशासन ने भुवन एप और सीआरएम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है। पंचायतों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी अभियान से जोड़ने की बात कही गई है, ताकि किसानों तक पराली प्रबंधन के कृषि और पर्यावरण संबंधी लाभों की जानकारी पहुंचाई जा सके।
प्रोत्साहन के साथ नियमों पर भी जोर
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रशासन पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी और जागरूकता दोनों पर काम कर रहा है। डीसी ने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
किसानों से फसल अवशेष न जलाने और उपलब्ध पराली प्रबंधन तकनीकों व सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की गई है। व्यक्तिगत किसान के लिए आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और प्रोत्साहन राशि पाने की समयसीमा इस जानकारी में नहीं दी गई है।
