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धान खरीदी पंजीयन 2026: मप्र के किसानों के लिए बड़ी खबर, Farmer ID के बिना नहीं होगा पंजीयन

सितम्बर 27, 2026
Report by: सपना वर्माKisan Culture
धान खरीदी पंजीयन 2026 के लिए दस्तावेज और मोबाइल जांचता मध्यप्रदेश का किसान

धान खरीदी पंजीयन कराने जा रहे मध्यप्रदेश के किसानों के लिए इस बार सबसे जरूरी दस्तावेज Farmer ID होगी। 15 अक्टूबर तक पंजीयन का मौका है और इसके बिना किसान सरकारी उपार्जन केंद्र पर धान बेचने के लिए रजिस्टर नहीं हो पाएंगे। करीब 45 लाख टन खरीदी के लक्ष्य के बीच इस बार दर्ज रकबे का 100 प्रतिशत सत्यापन भी होगा।

किसान कल्चर, भोपाल: धान खरीदी पंजीयन कराने जा रहे मध्यप्रदेश के किसानों के लिए इस बार नियम बदल गए हैं। सरकारी केंद्र पर धान बेचने के लिए अब Farmer ID अनिवार्य होगी और किसान 15 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन करा सकेंगे। प्रदेश में इस खरीफ सीजन करीब 45 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि खरीदी 1 नवंबर के बाद शुरू होने की संभावना है।

नई व्यवस्था का असर सीधे किसान के पंजीयन पर पड़ेगा। Farmer ID नहीं होने पर किसान उपार्जन के लिए पंजीयन नहीं करा सकेगा। इसके साथ पंजीयन में दर्ज धान के रकबे का 100 प्रतिशत सत्यापन कराने की तैयारी भी की गई है।

धान खरीदी पंजीयन में इस बार क्या बदला?

सरकार ने धान खरीदी में गलत खसरा दर्ज होने, फर्जी पंजीयन और गड़बड़ी की शिकायतों को देखते हुए Farmer ID को पंजीयन से जोड़ने का फैसला किया है।

पिछले वर्षों में कुछ जिलों से ऐसे मामले सामने आए थे, जिनमें किसान के पंजीयन में ऐसी जमीन के खसरे दर्ज पाए गए जो उसके नाम से जुड़े नहीं थे। राजगढ़, भिंड और मुरैना जैसे जिलों में भी इस तरह की शिकायतें सामने आई थीं।

नई व्यवस्था में किसान की पहचान, उसकी जमीन और संबंधित खसरे की जानकारी Farmer ID के जरिए जोड़ी जाएगी।

Farmer ID के बिना नहीं होगा पंजीयन

Farmer ID में किसान से जुड़ी जमीन और खसरों की जानकारी दर्ज रहती है। यह पहचान आधार से भी जुड़ी रहती है।

इसका फायदा यह होगा कि धान खरीदी पंजीयन करते समय ऑपरेटर मनमाने तरीके से किसी दूसरे किसान या दूसरी जमीन का खसरा नहीं जोड़ सकेगा। सरकार धान खरीदी की प्रक्रिया को किसान की वास्तविक जमीन से जोड़ना चाहती है।

इससे ऐसे मामलों पर भी रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है, जहां खेती एक व्यक्ति करता है लेकिन उपज किसी दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज जमीन के आधार पर बेच दी जाती है।

धान के रकबे का होगा 100% सत्यापन

इस बार सिर्फ धान खरीदी पंजीयन के दौरान ही नहीं, किसान द्वारा दर्ज कराए गए धान के रकबे की भी पूरी जांच होगी, यानी किसान ने जिस खेत में धान की खेती दिखाकर पंजीयन कराया है, उस जमीन पर वास्तव में धान बोया गया है या नहीं, इसका सत्यापन कराया जाएगा। पहले खातेदारों में बदलाव और भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी दूसरी वजहों के कारण रकबा सत्यापन में परेशानी आती रही है। अब सत्यापन का दायरा बढ़ाने की तैयारी है।

बटाईदार, सिकमी और वनभूमि पर खेती करने वाले किसानों के लिए पहले से लागू प्रावधानों के साथ उनके रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी।

धान खरीदी पंजीयन 2026 infographic जिसमें Farmer ID, 15 अक्टूबर की अंतिम तारीख, 45 लाख टन खरीदी लक्ष्य और 100 प्रतिशत रकबा सत्यापन की जानकारी है
मध्यप्रदेश में धान खरीदी पंजीयन के लिए Farmer ID अनिवार्य है। किसान 15 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन करा सकते हैं।

मध्यप्रदेश में 1.13 करोड़ से ज्यादा Farmer ID तैयार

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 तक मध्यप्रदेश में 1,13,53,326 Farmer ID बनाई जा चुकी थीं। अब इसी Farmer ID के आधार पर किसान की जमीन और खसरे की जानकारी को धान खरीदी पंजीयन से जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि Farmer ID और 100 प्रतिशत रकबा सत्यापन से गलत खसरा जोड़ने, फर्जी पंजीयन और बिचौलियों की भूमिका कम करने में मदद मिल सकती है।

45 लाख टन धान खरीदी का लक्ष्य

प्रदेश में इस खरीफ सीजन लगभग 45 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है।

धान खरीदी पंजीयन की प्रक्रिया 15 अक्टूबर तक चलेगी। इसके बाद रिकॉर्ड और रकबे का सत्यापन पूरा किया जाएगा। धान की सरकारी खरीदी 1 नवंबर 2026 के बाद शुरू होने की संभावना है।

किसानों के लिए ये चार बातें सबसे जरूरी

  • धान खरीदी पंजीयन की अंतिम तारीख: 15 अक्टूबर 2026
  • धान खरीदी: 1 नवंबर के बाद शुरू होने की संभावना
  • खरीदी का लक्ष्य: करीब 45 लाख टन
  • रकबे का सत्यापन: 100 प्रतिशत

धान खरीदी पंजीयन से पहले Farmer ID और जमीन का रिकॉर्ड जांच लें

सरकारी केंद्रों पर धान बेचने की तैयारी कर रहे किसानों को आखिरी तारीख का इंतजार नहीं करना चाहिए।

पंजीयन से पहले Farmer ID, आधार से जुड़ी जानकारी और जमीन के खसरों की जांच कर लें। अगर Farmer ID में जमीन या खसरे की जानकारी गलत है तो समय रहते उसे ठीक कराने की प्रक्रिया शुरू करें।

रिकॉर्ड में गड़बड़ी होने पर पंजीयन के समय परेशानी हो सकती है और किसान का धान उपार्जन भी प्रभावित हो सकता है।

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