ड्रोन दीदी: ₹12-15 हजार महीना कमाने वाली किरण संग सिंधिया ने थामा ‘उम्मीदों का रिमोट’

ड्रोन दीदी किरण अहिरवार के हाथ में रिमोट था और खेतों के ऊपर ड्रोन उड़ रहा था। कुछ देर बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी उनसे रिमोट लेकर ड्रोन की उड़ान देखी। लेकिन गुना की किरण की कहानी सिर्फ इस एक तस्वीर तक सीमित नहीं है। ड्रोन संचालन, जैविक खेती और वर्मी कम्पोस्ट से वे करीब ₹12 से ₹15 हजार प्रतिमाह की आय अर्जित कर रही हैं और मास्टर ट्रेनर के रूप में 125 से अधिक किसानों को आधुनिक खेती की जानकारी दे चुकी हैं।
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किसान कल्चर, गुना: बरखेड़ागिर्द गांव में आसमान की ओर उठती निगाहों के बीच एक कृषि ड्रोन उड़ान भर रहा था। नीचे खड़ी पगारा गांव की किरण अहिरवार रिमोट से उसकी दिशा नियंत्रित कर रही थीं। कुछ ही देर में उनके बगल में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया आ खड़े हुए। किरण ने उन्हें ड्रोन की तकनीक समझाई और सिंधिया ने भी रिमोट थामकर इसे उड़ाया।
तस्वीर देखने में एक ड्रोन डेमो की थी, लेकिन इसके पीछे गांव की एक महिला के जीवन में आए बदलाव की कहानी छिपी है।
आर्थिक मुश्किलों और सीमित अवसरों के बीच किरण ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ाने की शुरुआत की। पहले वर्मी कम्पोस्ट और जैविक खेती को अपनाया और फिर आधुनिक कृषि तकनीक की ओर कदम बढ़ाए। ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण लिया और धीरे-धीरे इलाके में उनकी नई पहचान बन गई, ‘ड्रोन दीदी’ किरण।
आज वे अलग-अलग आजीविका गतिविधियों के जरिए करीब ₹12,000 से ₹15,000 प्रतिमाह की आय अर्जित कर रही हैं। साथ ही मास्टर ट्रेनर के रूप में 125 से अधिक किसानों तक जैविक खेती और कृषि से जुड़ी जानकारी पहुंचा चुकी हैं।
ड्रोन दीदी ने पहले खुद सीखा, अब किसानों को सिखा रही हैं
किरण की कहानी में ड्रोन सिर्फ एक मशीन नहीं है। वह उनके लिए तकनीक सीखने और गांव के दूसरे किसानों तक उसे पहुंचाने का माध्यम भी बना है।
खेती में ड्रोन का उपयोग मुख्य रूप से तरल उर्वरक और कीटनाशक के छिड़काव में किया जाता है। इससे कम समय में खेत के बड़े हिस्से में छिड़काव किया जा सकता है। नमो ड्रोन दीदी योजना का मॉडल भी यही है कि प्रशिक्षित महिला स्वयं सहायता समूह किसानों को स्थानीय स्तर पर ड्रोन सेवाएं उपलब्ध करा सकें।
किरण ने जब बरखेड़ागिर्द में ड्रोन का लाइव डेमो दिया तो वहां मौजूद ग्रामीणों के लिए यह केवल नई मशीन देखने का मौका नहीं था। उनके सामने गांव की ही एक महिला उसे चला रही थी और उसके इस्तेमाल की जानकारी दे रही थी।
यही इस कहानी को अलग बनाता है। तकनीक गांव तक पहुंची, लेकिन उसका रिमोट भी गांव की महिला के हाथ में पहुंचा।
ड्रोन दीदी संग सिंधिया ने थामा रिमोट
बरखेड़ागिर्द में आयोजित मुख्यमंत्री जन-विश्वास शिविर के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किरण से ड्रोन संचालन की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने उनके साथ रिमोट थामकर खुद भी ड्रोन उड़ाया। कार्यक्रम में प्रदेश के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत भी मौजूद थे।
किरण के लिए यह क्षण पहचान का था। जिस तकनीक को कभी सीखना उनके लिए नया अनुभव रहा होगा, उसी तकनीक को अब वे दूसरों को समझा रही थीं।
लेकिन किसान के नजरिए से इससे भी बड़ा सवाल यह है कि ड्रोन जैसी तकनीक गांव में कितनी आसानी से सेवा के रूप में उपलब्ध होती है। किरण जैसी स्थानीय प्रशिक्षित महिलाओं की भूमिका यहीं महत्वपूर्ण हो जाती है।

आसमान में ड्रोन, जमीन पर किसान की समस्या
इस आयोजन में दूसरी तस्वीर भी दिखी। एक तरफ आधुनिक ड्रोन खेत के ऊपर उड़ रहा था, दूसरी तरफ ग्रामीण सरकारी योजनाओं से जुड़ी अपनी रोजमर्रा की समस्याएं लेकर शिविर में पहुंचे थे।
बलवीर सिंह सम्मान निधि की राशि नहीं मिलने की परेशानी लेकर आए। जांच में पता चला कि उनकी ई-केवाईसी अधूरी थी। अधिकारियों ने मौके पर प्रक्रिया पूरी कराई और बैंक स्टेटमेंट के जरिए भुगतान की स्थिति बताई।
एक तरफ ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक और दूसरी तरफ ई-केवाईसी की छोटी सी बाधा। गांव में बदलाव की ये दोनों तस्वीरें एक ही जगह नजर आईं।
राशन दुकान से आंगनबाड़ी तक पहुंचे सिंधिया
शिविर के दौरान सिंधिया ने राशन वितरण व्यवस्था का जायजा लिया और आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचकर बच्चों से बातचीत की। गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार किट भी वितरित की गई।
कार्यक्रम में कैंट चौराहे से गुलाबगंज तक करीब ₹3 करोड़ की लागत से प्रस्तावित सड़क का DPR तैयार होने की जानकारी भी दी गई।
जन-विश्वास शिविर का उद्देश्य ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने के बजाय एक ही स्थान पर संबंधित विभागों से जोड़ना था।
किरण की असली उड़ान जमीन पर
बरखेड़ागिर्द में उस दिन सबसे आकर्षक तस्वीर शायद हवा में उड़ता ड्रोन था, लेकिन किरण की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा जमीन पर है।
वर्मी कम्पोस्ट से शुरुआत, जैविक खेती से जुड़ाव, फिर ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण और अब दूसरे किसानों को जानकारी देना। यह सफर बताता है कि नई कृषि तकनीक गांव में तभी ज्यादा उपयोगी हो सकती है, जब उसे चलाने और किसान को समझाने वाला व्यक्ति उसी इलाके में मौजूद हो।
किरण ने तकनीक को केवल सीखा नहीं, उसे अपनी आजीविका का हिस्सा बनाया है। अब वे सिर्फ योजना की लाभार्थी नहीं हैं। वे ड्रोन ऑपरेटर हैं, मास्टर ट्रेनर हैं और उन ग्रामीण महिलाओं में शामिल हैं जिनके लिए खेती की बदलती तकनीक आय का नया रास्ता खोल रही है।
उस दिन सिंधिया ने कुछ देर के लिए रिमोट थामा था, लेकिन ड्रोन दीदी किरण के हाथ में यही रिमोट उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में आए बदलाव की पहचान बन चुका है।
क्या है नमो ड्रोन दीदी योजना?
नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों को किसानों को किराये पर कृषि सेवाएं देने के लिए ड्रोन से जोड़ा जाता है। ड्रोन पैकेज की लागत का 80% तक, अधिकतम ₹8 लाख, केंद्रीय वित्तीय सहायता के रूप में दिया जा सकता है। योजना में एक महिला सदस्य के लिए 15 दिन की ड्रोन पायलट ट्रेनिंग और दूसरी सदस्य या परिवार के सदस्य के लिए 5 दिन की ड्रोन सहायक ट्रेनिंग का प्रावधान है। ड्रोन का उपयोग मुख्य रूप से तरल उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए किया जाता है।
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