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धान आवक: जींद मंडियों में 26 हजार 224 मीट्रिक टन दर्ज

अक्टूबर 13, 2026
रिपोर्ट: किसान कल्चर डेस्कKisan Culture
azadi ka amrit mahotsav

किसान कल्चर, जींद, हरियाणा: जींद जिले की अनाज मंडियों में 26 हजार 224 मीट्रिक टन धान आवक दर्ज होने की सूचना है। हरियाणा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मुताबिक, खरीद एजेंसियों को खरीदे गए धान का उठान साथ-साथ कराने के निर्देश दिए गए थे, ताकि मंडियों में फसल उतारने में किसानों को परेशानी न हो।

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तस्वीर: हरियाणा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग

हरियाणा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जींद जिले की अनाज मंडियों में 26 हजार 224 मीट्रिक टन धान की आवक दर्ज हुई थी। यह आंकड़ा मंडियों में हुई आवक का है; खरीद एजेंसियों के आंकड़े विज्ञप्ति में अलग-अलग दिए गए हैं।

डीसी डाॅ. वैशाली शर्मा ने खरीद एजेंसियों को खरीदे गए धान का उठान साथ-साथ कराने के निर्देश दिए थे। विभाग के मुताबिक, प्रशासन का उद्देश्य किसानों को मंडियों में फसल उतारने के दौरान परेशानी से बचाना था।

विज्ञप्ति में बताया गया कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 20052 मीट्रिक टन, हैफेड ने 3488 मीट्रिक टन और हरियाणा वेयर हाउस कारपोरेशन ने 2684 मीट्रिक टन धान खरीदा था। उस समय मंडियों में ग्रेड-ए धान की आवक होने की जानकारी दी गई थी।

इन मंडियों में दर्ज हुई धान आवक

विज्ञप्ति में अलेवा मंडी में 1890 मीट्रिक टन, धमतान में 1083 मीट्रिक टन, गढ़ी में 1334 मीट्रिक टन, जींद में 465 मीट्रिक टन, मंगलपुर में 366 मीट्रिक टन, नगूरा में 398 मीट्रिक टन, नरवाना में 10075 मीट्रिक टन, पिल्लूखेड़ा में 570 मीट्रिक टन, सफीदों में 1235 मीट्रिक टन, उचाना में 290 मीट्रिक टन और आॅल्ड मार्किट उचाना में 7940 मीट्रिक टन धान की आवक व खरीद दर्ज होने की बात कही गई है।

खरल मंडी के लिए सूचना में 337 मीट्रिक टन और 133 मीट्रिक टन के दो आंकड़े दर्ज हैं।

किसानों से धान सुखाकर मंडियों में लाने की अपील की गई थी, ताकि फसल की बिक्री तुरंत हो सके। मंडियों की सुरक्षा के लिए पुलिस विभाग को पीसीआर गाड़ियों से समय-समय पर गश्त कराने के निर्देश दिए गए थे।

आधिकारिक पेज पर पोस्ट तिथि 13 Oct 2026 2:01PM और स्थान जींद, 13 अक्तूबर दर्ज है, लेकिन मूल प्रकाशन तिथि स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं है। इसलिए यह दिनांक-अनुपुष्ट पृष्ठभूमि सूचना है; धान आवक, खरीद और उठान की वर्तमान स्थिति किसानों को संबंधित मंडी या विभाग से सत्यापित करनी चाहिए।

स्रोत: हरियाणा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग