सोयाबीन भाव 2026: नई फसल से पहले MSP के नीचे बाजार, किसान की नजर अक्टूबर पर

सोयाबीन भाव 2026: नई खरीफ सोयाबीन की आवक शुरू होने से पहले ही किसानों के लिए चिंता बढ़ गई है। ₹5,708 प्रति क्विंटल के MSP के मुकाबले बाजार पहले से नीचे चल रहा है, जबकि कारोबारियों का अनुमान है कि नई फसल के शुरुआती सौदे गुणवत्ता और नमी के आधार पर ₹4,000 से ₹5,000 प्रति क्विंटल के बीच रह सकते हैं। कमजोर निर्यात मांग और प्रोसेसिंग प्लांटों की सीमित खरीद के कारण अक्टूबर में आवक बढ़ने के साथ भाव पर और दबाव की आशंका है।
Table of Contents
किसान कल्चर, भोपाल: मध्यप्रदेश में नई खरीफ सोयाबीन खेतों से मंडियों की ओर आने को तैयार है, लेकिन कटाई से पहले ही भाव किसानों की चिंता बढ़ा रहे हैं। सरकार ने 2026-27 के लिए पीली सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP ₹5,708 प्रति क्विंटल तय किया है, जबकि प्रदेश की कई मंडियों में कारोबार इससे नीचे हो रहा है।
21 सितंबर के उपलब्ध मंडी आंकड़ों में मध्यप्रदेश की 90 मंडियों में सोयाबीन का औसत मॉडल भाव करीब ₹5,300 प्रति क्विंटल रहा। भोपाल मंडी में FAQ सोयाबीन का मॉडल भाव ₹5,391 प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। यानी नई फसल की बड़ी आवक शुरू होने से पहले ही बाजार का औसत MSP से नीचे है।
सोयाबीन भाव 2026: नई सोयाबीन आने पर क्या रहेंगे भाव?
सितंबर के आखिरी सप्ताह से मध्यप्रदेश के कई इलाकों में सोयाबीन की कटाई शुरू होने लगती है और अक्टूबर में मंडियों में नई फसल की आवक बढ़ती है। ऐसे में किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि आवक बढ़ने पर भाव सुधरेंगे या बाजार पर और दबाव आएगा।
अशोकनगर के सोयाबीन कारोबारी सौरभ जैन (बाबू चक्रेश) का अनुमान है कि शुरुआती नई फसल का बाजार उसकी गुणवत्ता और नमी के आधार पर करीब ₹4,000 से ₹5,000 प्रति क्विंटल के दायरे में रह सकता है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में सोयाबीन में तुरंत बड़ी तेजी की संभावना कम दिखाई दे रही है।

जैन कहते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में किसानों के फसल चयन में बदलाव आया है और मक्का ने कई क्षेत्रों में जगह बनाई है। हालांकि इस साल के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सोयाबीन का रकबा भी पिछले साल के मुकाबले मामूली घटा है। 18 सितंबर तक देश में सोयाबीन करीब 122 लाख हेक्टेयर में बोया गया था, जबकि पिछले साल इसी समय लगभग 123 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई थी।
4 सितंबर के विस्तृत सरकारी आंकड़ों में मक्का का रकबा 91.09 लाख हेक्टेयर था। यह पिछले साल के 94.08 लाख हेक्टेयर से कम जरूर था, लेकिन मक्का के 80.77 लाख हेक्टेयर के सामान्य रकबे से काफी अधिक है। इसलिए इस साल सीधे मक्का का रकबा बढ़ने की बात कहने के बजाय इसे पिछले वर्षों में हुए फसल विविधीकरण के रूप में देखना ज्यादा सही होगा।

भारतीय सोया DOC की कमजोर निर्यात मांग बढ़ा रही दबाव
सोयाबीन बाजार की दूसरी बड़ी चिंता इसके प्रोसेसिंग कारोबार से जुड़ी है। सोयाबीन को क्रश करने के बाद निकलने वाली DOC यानी डी-ऑयल्ड केक या सोयामील पशु और पोल्ट्री फीड में इस्तेमाल होती है और इसका बड़ा बाजार विदेशों में भी रहा है।
इसी मोर्चे पर इस समय कमजोरी दिखाई दे रही है। SOPA के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में भारत से सोयामील का निर्यात करीब 25,000 टन रहा, जबकि अगस्त 2025 में यह करीब 1.50 लाख टन था। यानी एक साल में निर्यात में 83% से ज्यादा की गिरावट आई। अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच निर्यात भी पिछले साल की समान अवधि के 18.60 लाख टन से घटकर 9.97 लाख टन रह गया।
सौरभ जैन इसी कमजोर निर्यात मांग को सोयाबीन के भाव पर दबाव की बड़ी वजह मानते हैं। उनके मुताबिक भारतीय सोया DOC अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत के स्तर पर प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही है। ऐसे में प्रोसेसिंग प्लांट भी पहले की तरह नई फसल आते ही बड़े स्टॉक बनाने के बजाय जरूरत के मुताबिक खरीद को प्राथमिकता दे रहे हैं।
हालांकि घरेलू सोयामील मांग को पूरी तरह कमजोर कहना सही नहीं होगा। उपलब्ध उद्योग आंकड़ों में घरेलू मांग बनी हुई है। समस्या मुख्य रूप से निर्यात बाजार और भारतीय सोयामील की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता की है।
कम रकबा फिर भी भाव में तेजी क्यों नहीं?
आमतौर पर किसी फसल का रकबा और संभावित उत्पादन कम होने की आशंका बाजार को सहारा देती है। इस बार सोयाबीन का रकबा पिछले वर्ष से थोड़ा कम है, लेकिन फिलहाल इसका असर बाजार में बड़ी तेजी के रूप में दिखाई नहीं दे रहा।
इसके पीछे एक तरफ सोयामील निर्यात की कमजोरी है, तो दूसरी ओर प्रोसेसर्स की खरीद रणनीति भी महत्वपूर्ण है। मई में ऊंची घरेलू कीमतों के कारण भारतीय कारोबारियों को 25,000 टन सोयामील के निर्यात सौदे रद्द करने पड़े थे और अफ्रीकी देशों से सोयाबीन आयात के सौदे भी हुए थे। इससे यह साफ हुआ कि भारतीय सोयाबीन और उसके उत्पादों की कीमतों का गणित अब घरेलू फसल के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी तेजी से प्रभावित हो रहा है।
सोयाबीन भाव 2026: अब किसान किन बातों पर रखे नजर?
नई फसल की आवक बढ़ने के साथ अक्टूबर का बाजार सोयाबीन के लिए महत्वपूर्ण होगा। मंडियों में भाव केवल कुल उत्पादन से तय नहीं होंगे। नई फसल में नमी, दाने की गुणवत्ता, प्लांटों की खरीद, सोयामील के नए निर्यात ऑर्डर और सरकारी खरीद की स्थिति भी कीमतों की दिशा तय करेगी।
फिलहाल किसान के लिए सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा ₹5,708 प्रति क्विंटल का MSP है। बाजार इसके ऊपर टिकता है या नई आवक के दबाव में नीचे जाता है, आने वाले कुछ सप्ताह में इसकी तस्वीर साफ होगी। कारोबारी सौरभ जैन का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहीं तो खुले बाजार में भाव का MSP से लगातार ऊपर बने रहना आसान नहीं होगा।
इसलिए किसान के लिए केवल मंडी का अधिकतम भाव देखना पर्याप्त नहीं होगा। अलग-अलग मंडियों के मॉडल भाव, अपनी फसल की नमी और गुणवत्ता तथा सरकारी खरीदी से जुड़े फैसलों पर नजर रखना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।

ये भी पढ़े सोयाबीन के भाव 2026: तेजी आएगी या गिरावट? नई फसल का पूरा गणित…