मध्यप्रदेश में फिर बारिश का दौर: 12 जिलों में कमी, पकती फसल पर क्या होगा असर?

मध्यप्रदेश में बारिश का दौर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सोयाबीन, उड़द और मूंग की फसल पकने की ओर बढ़ रही है, इसी बीच मौसम विभाग ने कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना जताई है। एक जून से 15 सितंबर तक प्रदेश में सामान्य से 6 प्रतिशत कम बारिश हुई, लेकिन जिलों के बीच बड़ा अंतर है। पांच जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई, जबकि 12 जिले कम वर्षा की श्रेणी में पहुंच गए हैं।
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किसान कल्चर, भोपाल: मध्यप्रदेश में बारिश की गतिविधियां मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर दिखाई दे सकती हैं। मौसम केंद्र भोपाल के जिलेवार पूर्वानुमान के अनुसार 22 सितंबर तक अलग-अलग हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी। शुरुआती दिनों में कई जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवा चल सकती है
बारिश की यह संभावना ऐसे समय बनी है, जब प्रदेश में खरीफ फसलें महत्वपूर्ण अवस्था में पहुंच चुकी हैं। झाबुआ, अलीराजपुर और धार में सोयाबीन की फलियां बन रही हैं। बुंदेलखंड में उड़द, मूंग और सोयाबीन फलियां बनने की अवस्था में हैं। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में उड़द और मूंग दाना भरने से पकने की ओर बढ़ रही हैं। अलग-अलग समय पर हुई बुवाई के कारण एक ही जिले में फसल की अवस्था भी अलग हो सकती है।
भारतीय मौसम विभाग की कृषि सलाह में अधिक नमी वाले खेतों से पानी निकालने, फसल में कीट और रोग की निगरानी करने और बारिश के दौरान दवा का छिड़काव नहीं करने को कहा गया है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में नमी की कमी दिखाई देने पर फसल की अवस्था और स्थानीय पूर्वानुमान देखकर हल्की सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है।
मध्यप्रदेश में बारिश सामान्य, जिलों में बड़ा अंतर
भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक जून से 15 सितंबर 2026 तक मध्यप्रदेश में 837.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। इस अवधि में प्रदेश की सामान्य वर्षा 894.4 मिलीमीटर मानी जाती है। इस हिसाब से राज्य में सामान्य से 6 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
मौसम विभाग सामान्य के मुकाबले 19 प्रतिशत कम से 19 प्रतिशत अधिक बारिश को सामान्य श्रेणी में रखता है। इस कारण प्रदेश का आंकड़ा सामान्य से 6 प्रतिशत कम होने के बाद भी सामान्य वर्षा की श्रेणी में है।
प्रदेश के सभी हिस्सों में बारिश एक जैसी नहीं रही। अलीराजपुर में सामान्य से 43 प्रतिशत कम वर्षा हुई, जबकि निवाड़ी में सामान्य से 55 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। दोनों जिलों की स्थिति में 98 प्रतिशत अंक का अंतर है।
मध्यप्रदेश में बारिश: जानिए, 22 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम?
मध्यप्रदेश में बारिश का यह संभावित दौर कुछ जिलों में नमी की कमी दूर कर सकता है, लेकिन जलभराव वाले खेतों में नुकसान का खतरा बढ़ेगा। मौसम केंद्र भोपाल के 16 सितंबर को जारी जिलेवार पूर्वानुमान में 22 सितंबर तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। शुरुआती तीन दिनों में कई जिलों में गरज-चमक और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है।
मऊगंज, सतना और टीकमगढ़ सहित पूर्वी मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में शुरुआत में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। इसके बाद बारिश की गतिविधि कई स्थानों से घटकर कुछ स्थानों या कहीं-कहीं तक सीमित हो सकती है। पश्चिमी मध्यप्रदेश के जिलों में भी हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी।
जिले का पूर्वानुमान पूरे क्षेत्र में एक जैसी बारिश होने की गारंटी नहीं देता। किसी विकासखंड में बारिश हो सकती है और उसी जिले के दूसरे हिस्से में मौसम सूखा रह सकता है। किसानों को जिले के पूर्वानुमान के साथ अपने गांव की स्थानीय स्थिति पर भी ध्यान देना होगा।
मध्यप्रदेश में बारिश से फसल पर प्रभाव, कहीं राहत-कहीं नुकसान
मध्यप्रदेश में बारिश का राज्य स्तरीय आंकड़ा सामान्य दिखाई दे रहा है, लेकिन जिलेवार स्थिति काफी अलग है। प्रदेश के अलग-अलग कृषि जलवायु क्षेत्रों में फसल की अवस्था और नमी की स्थिति अलग है। झाबुआ, अलीराजपुर और धार में सोयाबीन फलियां बनने की अवस्था में है। इन जिलों के नमी की कमी वाले खेतों में हल्की बारिश फसल को राहत दे सकती है।
भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, सागर और दमोह में लगातार नमी रहने पर सोयाबीन, मूंग और उड़द में एन्थ्रेक्नोज, एरियल ब्लाइट और चारकोल रॉट जैसे रोगों का खतरा बढ़ सकता है। खेत में पानी जमा रहने पर पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बढ़ेगी।
बुंदेलखंड में उड़द, मूंग और सोयाबीन में पत्ती झुलसा रोग और इल्ली का प्रकोप दिखाई देने की संभावना है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में उड़द और मूंग दाना भरने से पकने की अवस्था में हैं। तेज हवा के साथ बारिश होने पर फसल गिरने और तैयार फलियों की गुणवत्ता प्रभावित होने का जोखिम रहेगा।
अधिक नमी सोयाबीन में पॉड ब्लाइट, एन्थ्रेक्नोज, बैक्टीरियल रोग और पत्तियों पर धब्बे पैदा करने वाले रोगों के लिए अनुकूल स्थिति बना सकती है। दूसरी तरफ अलीराजपुर, धार, झाबुआ, हरदा, नर्मदापुरम और बैतूल जैसे कम वर्षा वाले जिलों में हल्की बारिश मिट्टी की नमी बढ़ाने में मददगार हो सकती है।
कृषि वैज्ञानिक ने बताई बारिश से नुकसान की असली वजह
मध्यप्रदेश में बारिश और फसल की स्थिति पर कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि केवल जिले के औसत आंकड़े से नुकसान या लाभ तय नहीं किया जा सकता। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक वीरेन्द्र जैन के अनुसार, फसल पर असर केवल जिले की कुल बारिश से तय नहीं किया जा सकता। बारिश का वितरण, दो बारिश के बीच का अंतर, मिट्टी की नमी, जल निकासी और फसल की मौजूदा अवस्था भी महत्वपूर्ण है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश फसल को फायदा पहुंचा सकती है, लेकिन पकने की ओर बढ़ रही फसल में लगातार बारिश और जलभराव से नुकसान बढ़ सकता है।
श्री जैन ने किसानों को सलाह देते हुए कहा कि अब फसल पकने की ओर ऐसे हालातों में खेत में जल भराव फसल के लिए नुकसान दायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि किसान खेत में जल निकासी बनाए रखें और बारिश के दौरान कीटनाशक या फफूंदनाशक का छिड़काव न करें। कटाई का निर्णय भी स्थानीय मौसम पूर्वानुमान देखकर ही लें।
मध्यप्रदेश में बारिश: इन 12 जिलों में सामान्य से भी कम
प्रदेश के 12 जिलों में बारिश सामान्य से 20 प्रतिशत या अधिक कम है। मौसम विभाग ने इन जिलों को कम वर्षा की श्रेणी में रखा है।
| जिला | सामान्य से अंतर | श्रेणी |
|---|---|---|
| अलीराजपुर | 43% कम | कम वर्षा |
| धार | 35% कम | कम वर्षा |
| नर्मदापुरम | 35% कम | कम वर्षा |
| हरदा | 33% कम | कम वर्षा |
| रतलाम | 33% कम | कम वर्षा |
| झाबुआ | 32% कम | कम वर्षा |
| बैतूल | 31% कम | कम वर्षा |
| उज्जैन | 25% कम | कम वर्षा |
| छिंदवाड़ा | 25% कम | कम वर्षा |
| इंदौर | 22% कम | कम वर्षा |
| रायसेन | 20% कम | कम वर्षा |
| विदिशा | 20% कम | कम वर्षा |
इन जिलों में मानसून की शेष बारिश खरीफ फसल के साथ आगामी रबी सीजन के लिए भी महत्वपूर्ण होगी। बारिश मिट्टी की नमी, जलाशयों के भराव, कुओं के जलस्तर और सिंचाई की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती है।
इन पांच जिलों में सामान्य से अधिक बारिश
प्रदेश के पांच जिलों में सामान्य से 20 प्रतिशत से अधिक बारिश दर्ज हुई है। निवाड़ी और मऊगंज में बारिश सामान्य से 50 प्रतिशत से भी अधिक रही।
| जिला | सामान्य से अंतर | श्रेणी |
|---|---|---|
| निवाड़ी | 55% अधिक | अधिक वर्षा |
| मऊगंज | 54% अधिक | अधिक वर्षा |
| सतना | 45% अधिक | अधिक वर्षा |
| भिंड | 27% अधिक | अधिक वर्षा |
| शिवपुरी | 27% अधिक | अधिक वर्षा |
सामान्य से 60 प्रतिशत या अधिक बारिश होने पर जिले को अत्यधिक वर्षा की श्रेणी में रखा जाता है। 15 सितंबर तक मध्यप्रदेश का कोई जिला इस श्रेणी में नहीं है। सामान्य से 60 प्रतिशत या अधिक कमी वाली अत्यंत कम वर्षा की श्रेणी में भी कोई जिला नहीं है।
गुना और ग्वालियर में बारिश सामान्य
गुना में सामान्य से 7 प्रतिशत और ग्वालियर में 9 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। दोनों जिले सामान्य वर्षा की श्रेणी में हैं। सामान्य से अधिक बारिश होने के बाद भी यह अंतर 20 प्रतिशत से कम है, इसलिए इन्हें अधिक वर्षा वाले जिलों में शामिल नहीं किया जाएगा।
विदिशा में सामान्य से ठीक 20 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस कारण विदिशा कम वर्षा वाले जिलों में शामिल हो गया है।
अशोकनगर में एक जून से 15 सितंबर तक 703.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। इस अवधि की सामान्य वर्षा 802.5 मिलीमीटर है। अशोकनगर में बारिश सामान्य से 12 प्रतिशत कम है, लेकिन मौसम विभाग के मानक के अनुसार जिला सामान्य वर्षा की श्रेणी में है।
मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों का वर्षा प्रतिशत
नीचे दिए गए आंकड़े एक जून से 15 सितंबर 2026 तक की वास्तविक बारिश की संबंधित जिले की सामान्य वर्षा से तुलना बताते हैं।
| जिला | सामान्य से अंतर | श्रेणी |
|---|---|---|
| आगर मालवा | 7% अधिक | सामान्य |
| अलीराजपुर | 43% कम | कम |
| अशोकनगर | 12% कम | सामान्य |
| अनूपपुर | 9% अधिक | सामान्य |
| बड़वानी | 2% कम | सामान्य |
| बालाघाट | 9% कम | सामान्य |
| बैतूल | 31% कम | कम |
| भिंड | 27% अधिक | अधिक |
| भोपाल | 12% अधिक | सामान्य |
| बुरहानपुर | 14% अधिक | सामान्य |
| छतरपुर | 7% अधिक | सामान्य |
| छिंदवाड़ा | 25% कम | कम |
| दमोह | 9% कम | सामान्य |
| दतिया | 5% अधिक | सामान्य |
| देवास | 10% कम | सामान्य |
| धार | 35% कम | कम |
| डिंडोरी | 9% कम | सामान्य |
| गुना | 7% अधिक | सामान्य |
| ग्वालियर | 9% अधिक | सामान्य |
| हरदा | 33% कम | कम |
| इंदौर | 22% कम | कम |
| जबलपुर | 18% कम | सामान्य |
| झाबुआ | 32% कम | कम |
| कटनी | 7% कम | सामान्य |
| खंडवा | 5% कम | सामान्य |
| खरगोन | 12% अधिक | सामान्य |
| मैहर | 14% अधिक | सामान्य |
| मंडला | 5% कम | सामान्य |
| मंदसौर | 8% कम | सामान्य |
| मऊगंज | 54% अधिक | अधिक |
| मुरैना | 11% कम | सामान्य |
| नर्मदापुरम | 35% कम | कम |
| नरसिंहपुर | 8% कम | सामान्य |
| नीमच | 12% कम | सामान्य |
| निवाड़ी | 55% अधिक | अधिक |
| पांढुर्णा | 18% कम | सामान्य |
| पन्ना | 4% अधिक | सामान्य |
| रायसेन | 20% कम | कम |
| राजगढ़ | 19% अधिक | सामान्य |
| रतलाम | 33% कम | कम |
| रीवा | 15% कम | सामान्य |
| सागर | 16% कम | सामान्य |
| सतना | 45% अधिक | अधिक |
| सीहोर | 15% कम | सामान्य |
| सिवनी | 17% कम | सामान्य |
| शहडोल | 18% अधिक | सामान्य |
| शाजापुर | 19% कम | सामान्य |
| श्योपुर | 18% अधिक | सामान्य |
| शिवपुरी | 27% अधिक | अधिक |
| सीधी | 14% अधिक | सामान्य |
| सिंगरौली | 9% अधिक | सामान्य |
| टीकमगढ़ | 4% अधिक | सामान्य |
| उज्जैन | 25% कम | कम |
| उमरिया | 7% अधिक | सामान्य |
| विदिशा | 20% कम | कम |
एक दिन की अतिवृष्टि और पूरे सीजन की बारिश अलग
किसी स्थान पर एक दिन बहुत अधिक बारिश होने का अर्थ यह नहीं कि पूरे मानसून सीजन में उस जिले में सामान्य से अधिक पानी बरसा है। दैनिक वर्षा और एक जून से अब तक की संचयी वर्षा दो अलग आंकड़े हैं।
मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ में 15 सितंबर को 145 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। यह बहुत भारी वर्षा थी। इसके बावजूद एक जून से 15 सितंबर तक मंदसौर की कुल बारिश सामान्य से 8 प्रतिशत कम रही और जिला सामान्य वर्षा की श्रेणी में बना हुआ है।
इसी तरह आगर मालवा के सोयत कलां में 76 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। ऐसी तेज स्थानीय बारिश खेत में जलभराव या फसल नुकसान का कारण बन सकती है, लेकिन पूरे जिले का मौसमी आंकड़ा सामान्य रह सकता है।

किसानों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
मध्यप्रदेश में बारिश का औसत सामान्य होने के बावजूद खेत की वास्तविक स्थिति जिला, विकासखंड, गांव और मिट्टी के प्रकार के अनुसार बदल सकती है। जिन खेतों में पानी जमा है, वहां जल निकासी के रास्ते तुरंत खोलने चाहिए। सोयाबीन की फलियों, निचली पत्तियों और तनों पर धब्बे दिखाई देने पर रोग की पहचान कर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें। बारिश, तेज हवा या बिजली गिरने की आशंका के दौरान खेत में दवा का छिड़काव नहीं करें।
पकने की अवस्था में पहुंची उड़द और मूंग की कटाई मौसम साफ होने पर करें। कटी हुई उपज को खुले खेत में न छोड़ें। कम वर्षा वाले जिलों में सिंचाई का फैसला खेत की नमी और अगले दो से तीन दिन के स्थानीय मौसम पूर्वानुमान को देखकर करें।
प्रदेश का औसत सामान्य होने के बावजूद खेत की स्थिति जिला, विकासखंड, गांव और मिट्टी के प्रकार के अनुसार बदल सकती है। खरीफ उत्पादन पर अंतिम असर का आकलन केवल प्रदेश के औसत वर्षा आंकड़े से नहीं किया जा सकता।
आंकड़ों की अवधि: एक जून से 15 सितंबर 2026
स्रोत: IMD जिलेवार वर्षा रिपोर्ट, मौसम केंद्र भोपाल का जिलेवार पूर्वानुमान, मध्यप्रदेश कृषि मौसम सलाह
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