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मध्यप्रदेश में फिर बारिश का दौर: 12 जिलों में कमी, पकती फसल पर क्या होगा असर?

सितम्बर 16, 2026
Report by: प्राची मजूमदार चौकसेKisan Culture
मध्यप्रदेश में बारिश के बाद सोयाबीन के खेत का निरीक्षण करता किसान

मध्यप्रदेश में बारिश का दौर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सोयाबीन, उड़द और मूंग की फसल पकने की ओर बढ़ रही है, इसी बीच मौसम विभाग ने कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना जताई है। एक जून से 15 सितंबर तक प्रदेश में सामान्य से 6 प्रतिशत कम बारिश हुई, लेकिन जिलों के बीच बड़ा अंतर है। पांच जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई, जबकि 12 जिले कम वर्षा की श्रेणी में पहुंच गए हैं।

किसान कल्चर, भोपाल: मध्यप्रदेश में बारिश की गतिविधियां मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर दिखाई दे सकती हैं। मौसम केंद्र भोपाल के जिलेवार पूर्वानुमान के अनुसार 22 सितंबर तक अलग-अलग हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी। शुरुआती दिनों में कई जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवा चल सकती है

बारिश की यह संभावना ऐसे समय बनी है, जब प्रदेश में खरीफ फसलें महत्वपूर्ण अवस्था में पहुंच चुकी हैं। झाबुआ, अलीराजपुर और धार में सोयाबीन की फलियां बन रही हैं। बुंदेलखंड में उड़द, मूंग और सोयाबीन फलियां बनने की अवस्था में हैं। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में उड़द और मूंग दाना भरने से पकने की ओर बढ़ रही हैं। अलग-अलग समय पर हुई बुवाई के कारण एक ही जिले में फसल की अवस्था भी अलग हो सकती है।

भारतीय मौसम विभाग की कृषि सलाह में अधिक नमी वाले खेतों से पानी निकालने, फसल में कीट और रोग की निगरानी करने और बारिश के दौरान दवा का छिड़काव नहीं करने को कहा गया है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में नमी की कमी दिखाई देने पर फसल की अवस्था और स्थानीय पूर्वानुमान देखकर हल्की सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है।

मध्यप्रदेश में बारिश सामान्य, जिलों में बड़ा अंतर

भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक जून से 15 सितंबर 2026 तक मध्यप्रदेश में 837.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। इस अवधि में प्रदेश की सामान्य वर्षा 894.4 मिलीमीटर मानी जाती है। इस हिसाब से राज्य में सामान्य से 6 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

मौसम विभाग सामान्य के मुकाबले 19 प्रतिशत कम से 19 प्रतिशत अधिक बारिश को सामान्य श्रेणी में रखता है। इस कारण प्रदेश का आंकड़ा सामान्य से 6 प्रतिशत कम होने के बाद भी सामान्य वर्षा की श्रेणी में है।

प्रदेश के सभी हिस्सों में बारिश एक जैसी नहीं रही। अलीराजपुर में सामान्य से 43 प्रतिशत कम वर्षा हुई, जबकि निवाड़ी में सामान्य से 55 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। दोनों जिलों की स्थिति में 98 प्रतिशत अंक का अंतर है।

मध्यप्रदेश में बारिश: जानिए, 22 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम?

मध्यप्रदेश में बारिश का यह संभावित दौर कुछ जिलों में नमी की कमी दूर कर सकता है, लेकिन जलभराव वाले खेतों में नुकसान का खतरा बढ़ेगा। मौसम केंद्र भोपाल के 16 सितंबर को जारी जिलेवार पूर्वानुमान में 22 सितंबर तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। शुरुआती तीन दिनों में कई जिलों में गरज-चमक और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है।

मऊगंज, सतना और टीकमगढ़ सहित पूर्वी मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में शुरुआत में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। इसके बाद बारिश की गतिविधि कई स्थानों से घटकर कुछ स्थानों या कहीं-कहीं तक सीमित हो सकती है। पश्चिमी मध्यप्रदेश के जिलों में भी हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी।

जिले का पूर्वानुमान पूरे क्षेत्र में एक जैसी बारिश होने की गारंटी नहीं देता। किसी विकासखंड में बारिश हो सकती है और उसी जिले के दूसरे हिस्से में मौसम सूखा रह सकता है। किसानों को जिले के पूर्वानुमान के साथ अपने गांव की स्थानीय स्थिति पर भी ध्यान देना होगा।

मध्यप्रदेश में बारिश से फसल पर प्रभाव, कहीं राहत-कहीं नुकसान

मध्यप्रदेश में बारिश का राज्य स्तरीय आंकड़ा सामान्य दिखाई दे रहा है, लेकिन जिलेवार स्थिति काफी अलग है। प्रदेश के अलग-अलग कृषि जलवायु क्षेत्रों में फसल की अवस्था और नमी की स्थिति अलग है। झाबुआ, अलीराजपुर और धार में सोयाबीन फलियां बनने की अवस्था में है। इन जिलों के नमी की कमी वाले खेतों में हल्की बारिश फसल को राहत दे सकती है।

भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, सागर और दमोह में लगातार नमी रहने पर सोयाबीन, मूंग और उड़द में एन्थ्रेक्नोज, एरियल ब्लाइट और चारकोल रॉट जैसे रोगों का खतरा बढ़ सकता है। खेत में पानी जमा रहने पर पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बढ़ेगी।

बुंदेलखंड में उड़द, मूंग और सोयाबीन में पत्ती झुलसा रोग और इल्ली का प्रकोप दिखाई देने की संभावना है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में उड़द और मूंग दाना भरने से पकने की अवस्था में हैं। तेज हवा के साथ बारिश होने पर फसल गिरने और तैयार फलियों की गुणवत्ता प्रभावित होने का जोखिम रहेगा।

अधिक नमी सोयाबीन में पॉड ब्लाइट, एन्थ्रेक्नोज, बैक्टीरियल रोग और पत्तियों पर धब्बे पैदा करने वाले रोगों के लिए अनुकूल स्थिति बना सकती है। दूसरी तरफ अलीराजपुर, धार, झाबुआ, हरदा, नर्मदापुरम और बैतूल जैसे कम वर्षा वाले जिलों में हल्की बारिश मिट्टी की नमी बढ़ाने में मददगार हो सकती है।

कृषि वैज्ञानिक ने बताई बारिश से नुकसान की असली वजह

मध्यप्रदेश में बारिश और फसल की स्थिति पर कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि केवल जिले के औसत आंकड़े से नुकसान या लाभ तय नहीं किया जा सकता। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक वीरेन्द्र जैन के अनुसार, फसल पर असर केवल जिले की कुल बारिश से तय नहीं किया जा सकता। बारिश का वितरण, दो बारिश के बीच का अंतर, मिट्टी की नमी, जल निकासी और फसल की मौजूदा अवस्था भी महत्वपूर्ण है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश फसल को फायदा पहुंचा सकती है, लेकिन पकने की ओर बढ़ रही फसल में लगातार बारिश और जलभराव से नुकसान बढ़ सकता है।

श्री जैन ने किसानों को सलाह देते हुए कहा कि अब फसल पकने की ओर ऐसे हालातों में खेत में जल भराव फसल के लिए नुकसान दायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि किसान खेत में जल निकासी बनाए रखें और बारिश के दौरान कीटनाशक या फफूंदनाशक का छिड़काव न करें। कटाई का निर्णय भी स्थानीय मौसम पूर्वानुमान देखकर ही लें।

मध्यप्रदेश में बारिश: इन 12 जिलों में सामान्य से भी कम

प्रदेश के 12 जिलों में बारिश सामान्य से 20 प्रतिशत या अधिक कम है। मौसम विभाग ने इन जिलों को कम वर्षा की श्रेणी में रखा है।

जिलासामान्य से अंतरश्रेणी
अलीराजपुर43% कमकम वर्षा
धार35% कमकम वर्षा
नर्मदापुरम35% कमकम वर्षा
हरदा33% कमकम वर्षा
रतलाम33% कमकम वर्षा
झाबुआ32% कमकम वर्षा
बैतूल31% कमकम वर्षा
उज्जैन25% कमकम वर्षा
छिंदवाड़ा25% कमकम वर्षा
इंदौर22% कमकम वर्षा
रायसेन20% कमकम वर्षा
विदिशा20% कमकम वर्षा

इन जिलों में मानसून की शेष बारिश खरीफ फसल के साथ आगामी रबी सीजन के लिए भी महत्वपूर्ण होगी। बारिश मिट्टी की नमी, जलाशयों के भराव, कुओं के जलस्तर और सिंचाई की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती है।

इन पांच जिलों में सामान्य से अधिक बारिश

प्रदेश के पांच जिलों में सामान्य से 20 प्रतिशत से अधिक बारिश दर्ज हुई है। निवाड़ी और मऊगंज में बारिश सामान्य से 50 प्रतिशत से भी अधिक रही।

जिलासामान्य से अंतरश्रेणी
निवाड़ी55% अधिकअधिक वर्षा
मऊगंज54% अधिकअधिक वर्षा
सतना45% अधिकअधिक वर्षा
भिंड27% अधिकअधिक वर्षा
शिवपुरी27% अधिकअधिक वर्षा

सामान्य से 60 प्रतिशत या अधिक बारिश होने पर जिले को अत्यधिक वर्षा की श्रेणी में रखा जाता है। 15 सितंबर तक मध्यप्रदेश का कोई जिला इस श्रेणी में नहीं है। सामान्य से 60 प्रतिशत या अधिक कमी वाली अत्यंत कम वर्षा की श्रेणी में भी कोई जिला नहीं है।

गुना और ग्वालियर में बारिश सामान्य

गुना में सामान्य से 7 प्रतिशत और ग्वालियर में 9 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। दोनों जिले सामान्य वर्षा की श्रेणी में हैं। सामान्य से अधिक बारिश होने के बाद भी यह अंतर 20 प्रतिशत से कम है, इसलिए इन्हें अधिक वर्षा वाले जिलों में शामिल नहीं किया जाएगा।

विदिशा में सामान्य से ठीक 20 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस कारण विदिशा कम वर्षा वाले जिलों में शामिल हो गया है।

अशोकनगर में एक जून से 15 सितंबर तक 703.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। इस अवधि की सामान्य वर्षा 802.5 मिलीमीटर है। अशोकनगर में बारिश सामान्य से 12 प्रतिशत कम है, लेकिन मौसम विभाग के मानक के अनुसार जिला सामान्य वर्षा की श्रेणी में है।

मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों का वर्षा प्रतिशत

नीचे दिए गए आंकड़े एक जून से 15 सितंबर 2026 तक की वास्तविक बारिश की संबंधित जिले की सामान्य वर्षा से तुलना बताते हैं।

जिलासामान्य से अंतरश्रेणी
आगर मालवा7% अधिकसामान्य
अलीराजपुर43% कमकम
अशोकनगर12% कमसामान्य
अनूपपुर9% अधिकसामान्य
बड़वानी2% कमसामान्य
बालाघाट9% कमसामान्य
बैतूल31% कमकम
भिंड27% अधिकअधिक
भोपाल12% अधिकसामान्य
बुरहानपुर14% अधिकसामान्य
छतरपुर7% अधिकसामान्य
छिंदवाड़ा25% कमकम
दमोह9% कमसामान्य
दतिया5% अधिकसामान्य
देवास10% कमसामान्य
धार35% कमकम
डिंडोरी9% कमसामान्य
गुना7% अधिकसामान्य
ग्वालियर9% अधिकसामान्य
हरदा33% कमकम
इंदौर22% कमकम
जबलपुर18% कमसामान्य
झाबुआ32% कमकम
कटनी7% कमसामान्य
खंडवा5% कमसामान्य
खरगोन12% अधिकसामान्य
मैहर14% अधिकसामान्य
मंडला5% कमसामान्य
मंदसौर8% कमसामान्य
मऊगंज54% अधिकअधिक
मुरैना11% कमसामान्य
नर्मदापुरम35% कमकम
नरसिंहपुर8% कमसामान्य
नीमच12% कमसामान्य
निवाड़ी55% अधिकअधिक
पांढुर्णा18% कमसामान्य
पन्ना4% अधिकसामान्य
रायसेन20% कमकम
राजगढ़19% अधिकसामान्य
रतलाम33% कमकम
रीवा15% कमसामान्य
सागर16% कमसामान्य
सतना45% अधिकअधिक
सीहोर15% कमसामान्य
सिवनी17% कमसामान्य
शहडोल18% अधिकसामान्य
शाजापुर19% कमसामान्य
श्योपुर18% अधिकसामान्य
शिवपुरी27% अधिकअधिक
सीधी14% अधिकसामान्य
सिंगरौली9% अधिकसामान्य
टीकमगढ़4% अधिकसामान्य
उज्जैन25% कमकम
उमरिया7% अधिकसामान्य
विदिशा20% कमकम

एक दिन की अतिवृष्टि और पूरे सीजन की बारिश अलग

किसी स्थान पर एक दिन बहुत अधिक बारिश होने का अर्थ यह नहीं कि पूरे मानसून सीजन में उस जिले में सामान्य से अधिक पानी बरसा है। दैनिक वर्षा और एक जून से अब तक की संचयी वर्षा दो अलग आंकड़े हैं।

मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ में 15 सितंबर को 145 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। यह बहुत भारी वर्षा थी। इसके बावजूद एक जून से 15 सितंबर तक मंदसौर की कुल बारिश सामान्य से 8 प्रतिशत कम रही और जिला सामान्य वर्षा की श्रेणी में बना हुआ है।

इसी तरह आगर मालवा के सोयत कलां में 76 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। ऐसी तेज स्थानीय बारिश खेत में जलभराव या फसल नुकसान का कारण बन सकती है, लेकिन पूरे जिले का मौसमी आंकड़ा सामान्य रह सकता है।

मध्यप्रदेश में बारिश का जिलेवार आंकड़ा और सोयाबीन फसल
मध्यप्रदेश में बारिश सामान्य से 6 प्रतिशत कम, पांच जिलों में अधिक और 12 जिलों में कम वर्षा।

किसानों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?

मध्यप्रदेश में बारिश का औसत सामान्य होने के बावजूद खेत की वास्तविक स्थिति जिला, विकासखंड, गांव और मिट्टी के प्रकार के अनुसार बदल सकती है। जिन खेतों में पानी जमा है, वहां जल निकासी के रास्ते तुरंत खोलने चाहिए। सोयाबीन की फलियों, निचली पत्तियों और तनों पर धब्बे दिखाई देने पर रोग की पहचान कर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें। बारिश, तेज हवा या बिजली गिरने की आशंका के दौरान खेत में दवा का छिड़काव नहीं करें।

पकने की अवस्था में पहुंची उड़द और मूंग की कटाई मौसम साफ होने पर करें। कटी हुई उपज को खुले खेत में न छोड़ें। कम वर्षा वाले जिलों में सिंचाई का फैसला खेत की नमी और अगले दो से तीन दिन के स्थानीय मौसम पूर्वानुमान को देखकर करें।

प्रदेश का औसत सामान्य होने के बावजूद खेत की स्थिति जिला, विकासखंड, गांव और मिट्टी के प्रकार के अनुसार बदल सकती है। खरीफ उत्पादन पर अंतिम असर का आकलन केवल प्रदेश के औसत वर्षा आंकड़े से नहीं किया जा सकता।

आंकड़ों की अवधि: एक जून से 15 सितंबर 2026
स्रोत: IMD जिलेवार वर्षा रिपोर्ट, मौसम केंद्र भोपाल का जिलेवार पूर्वानुमान, मध्यप्रदेश कृषि मौसम सलाह

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